फर्जी एनकाउंटर से स्कूल बंदी तक… सपा प्रमुख ने गिनाईं सरकार की नकामी!
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में 18,727 सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह देश के भविष्य और गरीब वर्ग के बच्चों की शिक्षा के खिलाफ “बड़ा षड्यंत्र” है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि पहले 27 हजार स्कूलों को विलय के नाम पर बंद करने की कोशिश हुई, और अब राज्यसभा में सरकार ने 18,727 स्कूल बंद होने की बात स्वीकार की है। उनका आरोप है कि सरकारी स्कूल बंद होने से पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के बच्चों की शिक्षा और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं प्रभावित होंगी।
शिक्षा से जागरूकता आती है, इसलिए सरकार डरती है
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा से वैज्ञानिक सोच और जागरूकता बढ़ती है, जिससे संकीर्ण विचारधाराएं कमजोर होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षकों को पढ़ाई के बजाय अन्य कार्यों में लगाती है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
एनकाउंटर और राजनीतिक आरोपों पर भी सवाल

एसपी चीफ ने यह भी कहा कि “अधिकारी और सरकार ने मिलकर हजारों फर्जी एनकाउंटर किए” और विपक्षी दलों के नेताओं को झूठे मामलों में जेल भेजा गया। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे आरोपों को निंदनीय बताया।
“अगला चुनाव शिक्षा पर होगा” अखिलेश यादव ने दावा किया कि अगला चुनाव शिक्षा के मुद्दे पर लड़ा जाएगा और महिलाएं भाजपा को हराने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल बंद होने से निजी स्कूलों की फीस और अन्य खर्चों का बोझ गरीब परिवारों पर बढ़ेगा।
हिमालय और पर्यावरण पर चिंता: लखनऊ में डॉ. शेखर पाठक की चर्चा गोष्ठी

सपा मुख्यालय पर प्रख्यात पर्यावरणविद् और इतिहासकार शेखर पाठक के सम्मान में एक चर्चा गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी ने किया। डॉ. पाठक ने हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन, ग्लेशियर पिघलने, चारधाम मार्ग निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। जनसहभागिता के बिना पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं। गोष्ठी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पर्यावरणीय प्रयासों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण, अर्थनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं और इन पर व्यापक विमर्श की जरूरत है। कार्यक्रम में शिक्षकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही।
