नई दिल्ली : देशभर में मतदाता सूची को दुरुस्त और अद्यतन करने के लिए चुनाव आयोग ने बुधवार को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ दो दिवसीय अहम बैठक शुरू की। इस बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर चर्चा की जा रही है।
मतदाता सूची को “साफ-सुथरा” बनाना है लक्ष्य
बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों से पुराने, गलत या दोहराए गए रिकॉर्ड हटाकर उन्हें अपडेट करना है। चुनाव आयोग इस बार सूची को अधिक सटीक बनाने पर जोर दे रहा है ताकि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल न रहे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के तहत अवैध विदेशी प्रवासियों के नामों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू की जाएगी।
किन राज्यों से शुरू होगा अभियान
चुनाव आयोग की योजना के अनुसार, एसआईआर अभियान की शुरुआत उन राज्यों से की जाएगी जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें असम, केरल, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
इसके अलावा, कुछ अन्य राज्यों को भी पहले चरण में जोड़ा जा सकता है। वहीं जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं या जल्द प्रस्तावित हैं, वहां यह अभियान बाद में शुरू किया जाएगा ताकि स्थानीय चुनावी मशीनरी पर दबाव न पड़े।
पुरानी मतदाता सूचियों को बनाया जाएगा आधार
हर राज्य में पिछली बार हुई एसआईआर की रिकॉर्ड सूची को इस बार के अभियान का आधार बनाया जाएगा। बिहार में आखिरी एसआईआर 2003 में हुई थी, और हाल ही में 30 सितंबर को 7.42 करोड़ मतदाताओं की नई सूची प्रकाशित की गई है। दिल्ली में पिछली गहन पुनरीक्षण 2008 में हुई थी, जबकि उत्तराखंड में 2006 में। अधिकांश राज्यों में पिछली एसआईआर 2002 से 2004 के बीच कराई गई थी। अब राज्यों ने मौजूदा मतदाताओं का मिलान पुरानी सूची से लगभग पूरा कर लिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने दी जानकारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू करने की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। आयोग के तीनों आयुक्त जल्द ही राज्यों के लिए अभियान की तिथियाँ तय करेंगे। सितंबर में ही आयोग ने सभी राज्यों को एसआईआर के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए थे। अब लक्ष्य है कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले देशभर की मतदाता सूचियाँ पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित हो जाएँ।
चुनाव आयोग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ रिकॉर्ड सुधारना नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करना है। साफ-सुथरी मतदाता सूची ही निष्पक्ष लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है।
