कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित युवा भारती स्टेडियम में विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर लियोनल मेसी के आगमन के दौरान मची अव्यवस्था ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को हिला कर रख दिया है। बढ़ते विवाद और जनाक्रोश के बीच पश्चिम बंगाल के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरूप बिस्वास ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वीकार कर लिया है। अरूप बिस्वास के इस्तीफे के बाद खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय का प्रभार अब स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संभालेंगी।
अरूप बिस्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि निष्पक्ष जांच के हित में वह खेल विभाग की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। यह पत्र 15 दिसंबर 2025 का बताया जा रहा है। मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस पत्र को सार्वजनिक किया। हालांकि सोशल मीडिया पर साझा किए गए पत्र में अरूप बिस्वास के हस्ताक्षर न होने को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं, जिससे विवाद और गहरा गया।
इस्तीफे की पेशकश के तुरंत बाद खेल व युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नवान्न तलब किया गया। दोपहर में अधिकारी वहां पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि शनिवार को युवभारती स्टेडियम में हुई अव्यवस्था के बाद से ही फुटबॉल प्रेमियों और विपक्षी दलों के निशाने पर अरूप बिस्वास बने हुए थे।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजधर्म का पालन किया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है और सरकार ने बिना किसी दबाव के कार्रवाई की है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि वाम शासन के दौरान 1980 और 1996 में ईडन गार्डन्स में हुई घटनाओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था, जबकि मौजूदा सरकार युवभारती मामले की गंभीरता से जांच करा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है। मेसी के कार्यक्रम में लापरवाही बरतने के आरोप में विधाननगर के डीसीपी अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा राज्य के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि साल्ट लेक स्टेडियम के सीईओ डीके नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं। मुख्य सचिव ने बताया कि इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए राज्य सरकार ने चार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है। यह टीम साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्था, सुरक्षा चूक और प्रशासनिक लापरवाही की जांच करेगी।
गौरतलब है कि 13 दिसंबर को लियोनल मेसी पहली बार कोलकाता पहुंचे थे। हजारों प्रशंसक मेसी की एक झलक पाने के लिए स्टेडियम पहुंचे थे और महंगे टिकट खरीदे गए थे। लेकिन सुरक्षा कारणों से मेसी कुछ ही मिनट मैदान पर रह सके और उन्हें स्टेडियम से बाहर ले जाया गया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए और भारी अव्यवस्था फैल गई।
