डॉ. सुनीलम के नेतृत्व में किसान संघर्ष समिति ने उठाई राहत की मांग, ऋण और बिजली बिल माफी के साथ सिंचाई के लिए पानी व पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग
बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों व पशुपालकों को राहत देने की मांग को लेकर किसान संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। 22 अक्टूबर 2026 को दिए गए ज्ञापन में वर्षा की कमी, फसलों को नुकसान, सिंचाई के लिए पानी की किल्लत और पशुओं के लिए चारे की समस्या का मुद्दा उठाया गया। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने और गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के ने चेतावनी दी कि सरकार ने मांगों की अनदेखी की तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
सूखे का सर्वे कराकर किसानों को राहत देने की मांग
किसान संघर्ष समिति ने ज्ञापन में कहा कि वर्षा की कमी और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण बैतूल जिले के किसानों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। समिति ने सरकार से जिले में सूखे की स्थिति का तत्काल सर्वे कराने और बैतूल को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। इसके साथ ही किसानों के ऋण और बिजली बिल माफ करने, फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा देने तथा फसल बीमा और अन्य सरकारी राहत योजनाओं का लाभ जल्द उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
सिंचाई के लिए पानी और पशुओं के लिए निःशुल्क चारा उपलब्ध कराने की मांग
समिति ने मांग की कि पूरी तरह भर चुके बांधों से उपलब्ध पानी का नियमानुसार उपयोग कर किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाए। वहीं, जिन बांधों में 60 प्रतिशत तक पानी भरा है, उनसे जुड़े क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों से काटी गई बिजली बहाल करने की मांग की गई, ताकि किसान गन्ने और सब्जियों की फसलों की सिंचाई कर सकें। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को निःशुल्क चारा उपलब्ध कराने के साथ गांवों में पेयजल, पशुओं के लिए पानी और रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।
सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
डॉ. सुनीलम ने कहा कि बैतूल जिले के किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है। वर्षा की कमी और फसल नुकसान का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से समय रहते प्रभावी कदम उठाकर प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता आराधना भार्गव ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने सूखा घोषित कर किसानों को राहत देना शुरू कर दिया है, जबकि मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार किसानों की उपेक्षा कर रही है। जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के ने कहा कि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश सचिव सज्जे चंद्रवंशी, तहसील अध्यक्ष कृपाल सिंह सिसोदिया, भागवत परिहार, अनिल सोनी, पिरथी बारपेटे, कृष्णा ठाकरे, कैलाश डोंगरदिए, गजानन हजारे, हेमराज देशमुख, चैनसिंह सिसोदिया, तीरथ सिंह बलिहार, अनिल धोटे सहित किसान संघर्ष समिति के कई पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।
