साइबर ठगों ने डीआईजी बनकर पहलगाम आतंकी हमले में मददगार बताकर महिला को बनाया बंधक,।पुलिस की सतर्कता से बची जान व धन
बरेली : यूपी के बरेली से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां साइबर अपराधियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक बैंक कर्मी महिला को 42 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। ठगों ने महिला पर पहलगाम आतंकी हमले में शामिल होने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर 70 लाख की मांग की। शहर के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के एकतानगर निवासी गुलशन कुमारी, जो बैंक ऑफ बड़ौदा से रिटायर्ड हैं, को 11 अगस्त दोपहर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। स्क्रीन पर डीआईजी रैंक की टोपी और दो स्टार वाली वर्दी पहने एक व्यक्ति दिखा। उसने खुद को पहलगाम पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। उसने महिला पर आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर आईएसआई ने सैटेलाइट फोन खरीदे, और फर्जी आईडी बनाकर आतंकियों की मदद की।
42 घंटे का डर और कैद
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https://youtu.be/4dxgirNJGxo?si=2fSOyGjC9zlww06Y
ठगों ने महिला से कहा कि अगर वह इस बारे में किसी को बताएंगी, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामला गंभीर हो जाएगा। उन्होंने सोने-चांदी के जेवर, बैंक खातों में जमा रकम, और एफडी तुरंत निकालने का दबाव बनाया। डर के माहौल में महिला घर में ही कैद रहीं। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। ठगों ने उन्हें एनआईए अस्पताल भेजने का झांसा देकर और डराया।
एसपी सिटी की तत्परता ने बचाई जान
महिला की बेटी ने मामले की सूचना एसएसपी अनुराग आर्य को दी। तुरंत एसपी सिटी मानुष पारीक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और महिला को साइबर ठगों के चंगुल से मुक्त कराया। पुलिस ने पाया कि कॉल पर दिख रहा व्यक्ति वास्तविक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि एक साइबर ठग था। उसकी वर्दी पर दरोगा के दो स्टार थे लेकिन टोपी डीआईजी की थी।
पुलिस ने बचाव की दी सलाह
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया “डिजिटल अरेस्ट का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। अगर किसी को इस तरह की कॉल आती है, तो तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और निजी जानकारी साझा न करें।” गुलशन कुमारी ने बरेली पुलिस और एसपी सिटी का आभार व्यक्त किया। जिनकी सतर्कता से उनका और उनके परिवार का बड़ा नुकसान टल गया।
