किला फुटादरवाजा स्थित झंडा शरीफ पर अकीदतमंदों ने की चादरपोशी-गुलपोशी, भारत की खुशहाली, अमन-भाईचारे और बीमारों की शिफा के लिए मांगी गईं खास दुआएं
बरेली : शहर के किला फुटा दरवाजा स्थित गौस पाक के झंडा शरीफ पर चल रहे उर्स -ए- गौसिया की तकरीबात का शुक्रवार को हजरत सय्यद मीर वतन रहमतुल्लाह अलैह के कुल शरीफ के साथ खत्म हो गया।कुल शरीफ के मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे और चादरपोशी व गुलपोशी कर।अपनी मन्नतों-मुरादों के लिए दुआएं मांगीं। उर्स की तकरीबात की शुरुआत बाद नमाज-ए-फज्र कुरआन पाक की आयतों की तिलावत से हुई। इसके बाद तकरीरी महफिल में उलमा ने बुजुर्गों की जिंदगी और उनकी तालीमात पर रोशनी डाली।वक्ताओं ने कहा कि पीराने पीर दस्तगीर गौस- ए -आजम ने मुश्किल हालात में भी सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ा और लोगों को इंसानियत, नेकी, मदद और हक की राह पर चलने का पैगाम दिया।
308 साल पहले बगदाद शरीफ से लाया गया झंडा शरीफ
उर्स कमेटी के सचिव फराज मियां कादरी ने बताया कि हजरत सय्यद मीर वतन रहमतुल्लाह अलैह के खानदानी बुजुर्ग करीब 308 वर्ष पहले बगदाद शरीफ से गौस-ए-आजम के रोजा -ए-मुबारक से झंडा शरीफ बरेली शरीफ लाए थे। उन्होंने कहा कि यह मुकद्दस झंडा बरेली और शहरवासियों की हिफाजत व अमन की दुआओं से जुड़ी आस्था का प्रतीक माना जाता है।
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने की चादरपोशी
इससे पहले पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने झंडा शरीफ पर हाजिरी दी और चादरपोशी कर अमन व भाईचारे के लिए खास दुआ मांगी। वहीं, बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक एवं समाजसेवी पम्मी खां वारसी ने भी अपनी अकीदत का इजहार किया। उन्होंने कहा कि गौसे आजम ने सच्चाई की राह पर चलकर इंसानियत और भलाई का पैगाम दिया।
महफिल-ए-समा में पेश किए गए कलाम
उर्स के दौरान आयोजित महफिल-ए-समा में फनकारों ने अपने कलाम पेश किए और बुजुर्गों की रूहानी जिंदगी व उनकी तालीमात पर रोशनी डाली। इस दौरान रंग शरीफ भी पढ़ा गया। महफिल में मौजूद अकीदतमंदों ने पूरी अकीदत के साथ कार्यक्रम में शिरकत की।
कुल शरीफ के बाद देश की खुशहाली के लिए दुआ
बाद नमाज-ए-जुमा दोपहर 2:38 बजे हजरत सय्यद मीर वतन रहमतुल्लाह अलैह के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।इसके बाद भारत की खुशहाली और तरक्की, अमन-भाईचारे तथा बीमारों की शिफा के लिए खास दुआएं की गईं। महफिल में सलातो-सलाम का नजराना भी पेश किया गया। इस दौरान अकीदतमंदों को लंगर और तबर्रुक वितरित किया गया। इस दौरान उर्स कमेटी के सरपरस्त हाजी शावेज हाशमी, सचिव फराज मियां कादरी और अहमद खान टीटू ने उर्स की व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए पुलिस -प्रशासन का शुक्रिया अदा किया। साथ ही कार्यक्रम की कवरेज के लिए मीडिया का भी आभार जताया।
बड़ी संख्या में अकीदतमंद रहे मौजूद
उर्स-ए-गौसिया के समापन कार्यक्रम में हाजी शावेज हाशमी, सोहेल शम्सी, मोबिन खान, अकलीम बेग अंजुम, सोहेल हाशमी, यावर अली खां बिट्टू, आसिम हुसैन कादरी, सय्यद पप्पू जमील, अशरफ शम्सी, नावेद हाशमी, फरमान खान, बाबू, नादिर खान, मुन्ना अंसारी, शहशांह मियां, बाबू नियाजी, ताहिर खान, फैजी खान, सय्यद काजिम अली, मुजाहिद इस्लाम, अरबाज खान, मुजम्मिल खान, इस्तेखार शम्सी, सलीम बेग, आसिफ शम्सी, फुरकान खान, चांद मियां, संजय सैनी, जावेद, जाहिद शम्सी, नदीम शम्सी, इमरान अंसारी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
