शाही के तुरसा गांव में हुआ हादसा, पढ़ाई के लिए उठा मासूम पोता बच गया,आर्थिक तंगी के बीच आवास का आवेदन भी था लंबित
बरेली: यूपी के बरेली जिले के शाही थाना क्षेत्र के तुरसा गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। जर्जर कच्चे मकान का छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इसकी चपेट में आकर 70 वर्षीय नत्थो देवी और उनकी 6 वर्षीय नातिन दीपांजलि मलबे में दब गईं। परिजन उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है, जबकि पूरे गांव में मातम पसरा है।
चारपाई पर बैठी थीं दादी और नातिन
परिजनों के मुताबिक, तुरसा गांव निवासी आनंदस्वरूप अपने भाइयों यशपाल और विजयपाल के परिवार के साथ एक ही मकान में रहते हैं। घर का एक हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका था। कच्ची छत गिरने के बाद दीवार के सहारे छज्जा टिका हुआ था, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं हो सकी थी।शनिवार शाम करीब छह बजे नत्थो देवी अपनी छह वर्षीय नातिन दीपांजलि और दस वर्षीय पोते संदेश के साथ चारपाई पर बैठी थीं। इसी दौरान अचानक छज्जा भरभराकर उनके ऊपर गिर पड़ा और दोनों मलबे में दब गईं।
पेंसिल लेने उठा पोता, टल गया बड़ा हादसा
हादसे के कुछ सेकंड पहले दस वर्षीय संदेश पढ़ाई के लिए पेंसिल लेने चारपाई से उठकर चला गया था। इसी वजह से उसकी जान बच गई। अगर वह भी वहीं बैठा रहता तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला गया और पहले स्थानीय अस्पताल, फिर बरेली रेफर किया गया। लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे
घटना की सूचना मिलने पर शाही थाना पुलिस देर रात मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।सीओ मीरगंज अजय कुमार ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
आर्थिक तंगी में जी रहा है परिवार
परिवार के चचेरे सदस्य जगदीश प्रसाद ने बताया कि तीनों भाइयों के पास कुल नौ बीघा कृषि भूमि है, जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल से होता है। खेती के साथ मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण किया जाता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण जर्जर मकान की मरम्मत भी नहीं कराई जा सकी।
आवास का इंतजार, लेकिन उससे पहले उजड़ गया परिवार
सबसे मार्मिक बात यह है कि मृतका नत्थो देवी ने सरकारी आवास के लिए आवेदन किया था, जो अभी लंबित था। पंचायत सचिव अंजली के अनुसार, नत्थो देवी का आवेदन प्रक्रिया में था, जबकि दीपांजलि की मां सुनीता देवी का नाम स्वीकृत आवासों की सूची में शामिल है। सरकारी मदद मिलने से पहले ही परिवार पर ऐसा दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
कक्षा एक की छात्रा थी दीपांजलि
हादसे में जान गंवाने वाली छह वर्षीय दीपांजलि गांव के स्कूल में कक्षा एक की छात्रा थी। उसकी असमय मौत से स्कूल और गांव में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते जर्जर मकान की मरम्मत या आवास की सुविधा मिल जाती, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था।
