फर्जी रिपोर्ट से नक्शा पास! कॉलोनाइजरों पर शिकंजा कसना तय
बरेली : यूपी के बरेली में सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कॉलोनियां बसाए जाने का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। जिला सहकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष महेश पांडेय की शिकायत पर शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और कॉलोनाइजरों में खलबली मच गई है।
तालाब, चकमार्ग और सीलिंग की जमीन पर कॉलोनियां
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तालाब,चकमार्ग, खाई और सीलिंग श्रेणी की सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर कॉलोनियां विकसित कर दी गईं। इस मामले में बदायूं रोड की साउथ सिटी,पीलीभीत बाइपास की हारमोनी कॉलोनी और डोहरा रोड स्थित होराइजन सुपरसिटी कॉलोनी प्रमुख रूप से जांच के दायरे में हैं।
19 दिसंबर को शासन से डीएम को आदेश
शिकायतकर्ता महेश पांडेय ने 22 नवंबर को मुख्यमंत्री के यहां शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर 19 दिसंबर को शासन स्तर से डीएम बरेली को प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए।
राजस्व कर्मियों की मिलीभगत का आरोप
शिकायतकर्ता का दावा है कि राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी रिपोर्ट तैयार कर बीडीए को भेजी गई, जिसके आधार पर भवनों के नक्शे स्वीकृत कराए गए। आरोप है कि नियमों और वास्तविक भूमि स्थिति को छिपाकर नक्शा पास कराया गया।
कई कंपनियों के नाम पर खेल!
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कॉलोनाइजरों ने स्वयं और परिजनों के नाम पर कई कंपनियां बना रखी हैं, जिनके जरिए जमीनों का विकास दिखाया गया। इनमें केसर बिल्डटेक, कावेर इंटरप्राइजेज, प्राइम प्रॉपर्टीज और सिल्वर स्टेट जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं।
साउथ सिटी में तालाब और चकमार्ग छिपाने का आरोप
महेश पांडेय के अनुसार, साउथ सिटी कॉलोनी में तालाब, चकमार्ग, खाई और सीलिंग की जमीन होने के तथ्य छिपाकर बीडीए से नक्शा स्वीकृत कराया गया। शिकायत में कहा गया है कि सुपरसिटी कॉलोनी की संपूर्ण जमीन सीलिंग की है। सिल्वर स्टेट जिस जमीन पर विकसित की गई, वह तालाब और सीलिंग की श्रेणी में आती है।
जमीन के खसरे में भूमि जलमग्न और खाई के रूप में दर्ज, तहसीलदार सदर को सौंपी गई जांच
एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने बताया कि शासन के निर्देश पर साउथ सिटी, हारमोनी और होराइजन सुपरसिटी कॉलोनियों के भूमि अभिलेखों की जांच के लिए तहसीलदार सदर को निर्देशित किया गया है। एडीएम सिटी ने साफ किया है कि यदि जांच में कॉलोनियां सरकारी जमीन पर बनी पाई गईं, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
