बरेली : दहेज उत्पीड़न से जुड़ा एक दर्दनाक मामला आखिरकार कोर्ट के फैसले तक पहुंचा, जहां गर्भवती महिला की मौत के मामले में पति और ससुर को दोषी ठहराया गया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
शादी के बाद शुरू हुआ दहेज के लिए उत्पीड़न
भगवानदास निवासी ग्राम ज्योरा मकरन्दपुर थाना नवाबगंज ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी रूबी की शादी 11 मार्च 2019 को जगमोहन निवासी ग्राम सभापुर थाना हाफिजगंज से की थी। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से एक लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की जाने लगी। जब परिवार इस मांग को पूरा नहीं कर सका तो रूबी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। रूबी ने कई बार अपने पिता को इस बारे में बताया था।
फोन पर मांगी मदद, कुछ देर बाद मिली मौत की खबर
25 अप्रैल, 2024 की सुबह करीब 6:30 बजे रूबी ने अपने पिता को फोन कर कहा कि अगर एक लाख रुपये लेकर तुरंत नहीं आए, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। कुछ समय बाद जब भगवानदास अपनी बेटी के ससुराल पहुंचे तो वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था। रूबी की लाश घर के आंगन में पड़ी थी। उस समय वह करीब छह महीने की गर्भवती थी।
कोर्ट में चले मामले में 9 गवाह पेश
इस मामले में थाना हाफिजगंज में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें दहेज हत्या, उत्पीड़न और मारपीट समेत अन्य धाराएं लगाई गई थीं। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 गवाह पेश किए गए, जिनके बयानों और सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी माना।
पति और ससुर को अलग-अलग धाराओं में सख्त सजा
अदालत ने जगमोहन और उसके पिता हरिराम को दहेज हत्या के मामले में 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जबकि दहेज उत्पीड़न की धारा 498A के तहत दोनों को 2-2 साल का सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही मारपीट और दहेज निषेध कानून के तहत 1-1 साल का सश्रम कारावास और 4-4 हजार रुपये का जुर्माना भी सुनाया गया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोनों आरोपियों को अतिरिक्त तीन महीने की जेल भुगतनी होगी।
