बरेली : यूपी के बरेली पुलिस का कहना है कि शहर को बवाल की आग में झोंकने वाली साजिश की एक अहम कड़ी पुलिस के हाथ लग गई है। जिस भड़काऊ पत्र (लेटर) के जरिए भीड़ जुटाकर माहौल को उकसाया गया था, वह पत्र पुलिस ने मौलाना तौकीर रज़ा के करीबी और आईएमसी नेता नदीम के घर से बरामद कर लिया है। इस बरामदगी के बाद बरेली बवाल की साजिश पर से पर्दा उठने लगा है। पुलिस ने आरोपी नदीम को अदालत से 4 घंटे की रिमांड पर लिया था। इसी दौरान जब उसे मेडिकल परीक्षण के लिए कड़ी सुरक्षा में जिला अस्पताल लाया गया, तो प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। अस्पताल और आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। कई थानों की फोर्स, पीएसी और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर तैनात रहे, जबकि सभी रास्ते पूरी तरह सील कर दिए गए।
एसपी सिटी बोले – पत्र के माध्यम से जुटाई गई थी भीड़
एसपी सिटी मानुष पारीक के अनुसार, बरामद किया गया पत्र वही है। जिसे वायरल कर 26 सितंबर को लोगों को एक स्थान पर जुटने का आह्वान किया गया था। पुलिस का कहना है कि यह कोई सामान्य पत्र नहीं, बल्कि सोची-समझी दंगा साजिश का लिखित औजार था। जिसके जरिए माहौल जानबूझकर भड़काया गया। इस मामले में पहले ही लियाकत नामक व्यक्ति की शिकायत पर नदीम और मौलाना तौकीर रज़ा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। शिकायत में आरोप है कि लियाकत के नाम और फर्जी हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर भड़काऊ पत्र तैयार कराया गया और उसे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया गया, ताकि बड़ी संख्या में भीड़ जुटाई जा सके।
26 सितंबर को हिंसा में बदला प्रदर्शन
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 26 सितंबर को इस्लामिया ग्राउंड में भीड़ जुटाने का आह्वान किया गया था। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े और कोतवाली थाना क्षेत्र के जिला पंचायत रोड पर स्थिति बेकाबू हो गई। जिला पंचायत गेट के सामने प्रदर्शन हिंसक हो गया और उपद्रवियों ने पुलिस बल पर अंधाधुंध पथराव शुरू कर दिया। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। लेकिन दंगाइयों की बर्बरता यहीं नहीं रुकी।
पुलिस पर जानलेवा हमले, और हथियार छीनने का आरोप
पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों से हथियार, वायरलेस सेट और एंटी -राइट गन तक छीन ली। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया, जिसे प्रशासन सीधे तौर पर राज्य की कानून-व्यवस्था को चुनौती मान रहा है। इस पूरे प्रकरण में दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और पुलिस पर जानलेवा हमला जैसी गंभीर धाराओं में अलग -अलग थानों में कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अब तक की कार्रवाई में पुलिस 100 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
फॉरेंसिक जांच से खुलेगा पूरा नेटवर्क
इस बरामद भड़काऊ लेटर को पुलिस ने जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी कर ली है। अब जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि पत्र किसने लिखा, किन-किन माध्यमों से उसे वायरल किया गया और इस दंगा साजिश में और कौन-कौन चेहरे शामिल हैं। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि बरेली को जलाने की साजिश रचने वालों पर कानून का सबसे सख्त प्रहार होगा। रसूख और दबाव नहीं, अब सिर्फ कानून बोलेगा।
