कम वेतन, कम सुरक्षा, बैंकिंग सेक्टर का नया चेहरा, यूनियन ने उठाई स्थायी नौकरी की मांग
संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन और सेवानिवृत्त बैंक कर्मी
बैंकों में अस्थाई और संविदा कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार द्वारा स्थायी भर्तियों पर रोक लगाए जाने के बाद अब बैंक एजेंसियों के ज़रिए ठेका कर्मचारी रख रहे हैं। इन कर्मचारियों को कम वेतन पर काम करना पड़ता है, जबकि एजेंसियां भी उनके मानदेय का बड़ा हिस्सा काट लेती हैं। लोकसभा में पेश हालिया रिपोर्ट ने सरकारी बैंकों की संविदा कर्मियों पर बढ़ती निर्भरता को उजागर किया है।
एसबीआई में सबसे अधिक 27.11% संविदा कर्मी
SBI में संविदा कर्मचारियों की संख्या सबसे ज़्यादा 64,995 कर्मचारी यानी 27.11%, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 21.56%, पंजाब एंड सिंध बैंक 13.85%,यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 7.6%, तो वहीं सबसे कम पंजाब नेशनल बैंक 0.93%, संविदा कर्मी हैं।
नौकरी सुरक्षा बेहद कम
संविदा कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा बेहद कम है। लंबे समय तक कौशल प्रतिधारण और कर्मचारी कल्याण प्रभावित होता है। प्रशिक्षण और करियर विकास के अवसर सीमित हैं। नीतियों और प्रक्रियाओं की समझने में समय लगता है, तो वहीं जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने में मुश्किल।
यूनियनों ने जताई नाराजगी
बैंक यूनियनों ने बार-बार मांग की है कि अस्थाई कर्मचारियों को नियमित किया जाए और उन्हें उचित मानदेय दिया जाए। संजीव मेहरोत्रा का कहना है कि “बैंकों की नींव इन अस्थाई कर्मचारियों पर खड़ी है। मगर, उनका भविष्य असुरक्षित है। सरकार और प्रबंधन को जल्द कदम उठाना चाहिए।
