बरेली : यूपी के बरेली देहात के शाही थाना क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद का बुधवार को बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया, जब सिविल कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई कर अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया। विवादित भूमि पर बनी चार दुकानों और एक मकान को ध्वस्त कर करीब एक बीघा जमीन कब्जामुक्त कराई गई, और वादी पक्ष को सुपुर्द कर दी गई। यह कार्रवाई शाही थाना क्षेत्र के मिर्जापुर धनेटा मार्ग स्थित मकड़ीखोए गांव में की गई। यहां सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। मौके पर पांच थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी पीएसी तैनात रही, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
2023 में दर्ज हुआ था वाद, दबंगई से कब्जे का आरोप
मामले की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी, जब जसवंत सिंह, बनवारी लाल, सुखलाल और कुंवर सेन ने बरेली सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया था। वादी पक्ष का आरोप था कि हैदरगंज निवासी छत्रपाल, लेखराज और मकड़ीखोए गांव की डल्लो रानी व उनके पुत्र डॉ. दीपक कुमार ने दबंगई के बल पर उनकी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया।
29 जुलाई 2025 को कोर्ट ने दिया था स्पष्ट आदेश
लंबी सुनवाई के बाद सिविल कोर्ट ने 29 जुलाई 2025 को आदेश पारित करते हुए कहा था कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा किए गए अवैध निर्माण को दो माह के भीतर ध्वस्त कर मलबा हटाया जाए और भूमि को पूर्व स्थिति में लाकर वादी पक्ष को सौंपा जाए।निर्धारित समय में आदेश का अनुपालन न होने पर वादी पक्ष ने दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
तीन घंटे तक चली बुलडोजर कार्रवाई

बुधवार दोपहर करीब 12 बजे कोर्ट के अमीन राकेश चंद्र की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। दो बुलडोजरों ने करीब तीन घंटे तक अभियान चलाकर सड़क किनारे बनी चार दुकानों और पीछे बने मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।ध्वस्तीकरण के बाद अवैध मलबा हटवाया गया और मौके पर ही वादी पक्ष के जसवंत सिंह को भूमि पर कब्जा दिलाया गया।
गांव में जुटी भारी भीड़, रहा कड़ा पुलिस पहरा

कार्रवाई के दौरान आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। छतों और सड़कों पर खड़े होकर लोग बुलडोजर कार्रवाई को देखते रहे। हालांकि पुलिस बल की सतर्कता के चलते पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई।
प्रशासन का संदेश-कोर्ट के आदेश सर्वोपरि
इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर कोर्ट के आदेशों के सख्त अनुपालन का उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध कब्जे और निर्माण किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
