बरेली : यूपी के बरेली देहात की अनिरुद्धपुर गोशाला में गोवंश की मौत का मामला अब प्रशासनिक गलियारों से होते हुए शासन तक गूंजने लगा है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) डॉ. मनमोहन पांडेय के स्थानांतरण और पशु चिकित्सा अधिकारी (VO) डॉ. संजय वर्मा के निलंबन की संस्तुति डीएम को भेज दी है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, निगरानी में भारी चूक, उदासीन कार्यशैली और समय पर हस्तक्षेप न होने के चलते गोशाला की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिसका नतीजा गोवंश की मौत के रूप में सामने आया।
जांच रिपोर्ट में क्या-क्या उजागर हुआ?
सीडीओ की रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि CVO स्तर से गोशालाओं की नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो रही थी फील्ड टीम पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था। बीमार गोवंशों के इलाज, पोषण और सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती गई। इन्हीं आधारों पर CVO के स्थानांतरण और फील्ड स्तर पर जिम्मेदारी निभाने में विफल VO के निलंबन की संस्तुति की गई है।
पशु चिकित्सक को नोटिस, जनवरी का वेतन रोका गया
इस मामले में CVO की ओर से सिरौली के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार वर्मा को चार बिंदुओं पर नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि गोशाला परिसर और नादों में अत्यधिक गंदगी क्यों पाई गई। मृत गोवंशों के शवों के निस्तारण में देरी क्यों हुई।भरण -पोषण और देखरेख में लापरवाही कैसे हुई। बीमार पशुओं को सिक वार्ड में रखने के बजाय खुले में क्यों छोड़ा गया, जबकि ठंड चरम पर थी
नोटिस के साथ ही जनवरी माह का वेतन भी रोक दिया गया है। जांच में सामने आया है कि खुले में छोड़े गए बीमार गोवंशों को पक्षी नोच रहे थे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
भूख और बीमारी से पांच गोवंशों की मौत, वीडियो वायरल
अनिरुद्धपुर गोशाला में भूख, बीमारी और ठंड के कारण पांच गोवंशों की मौत की सूचना जैसे ही शासन तक पहुंची, विभागीय अफसर हरकत में आ गए। पशुपालन विभाग के निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट में गोशाला परिसर में व्यापक गंदगी नादों में चारा और पानी की कमी केयर-टेकरों की घोर लापरवाही की पुष्टि की गई है। बताया जा रहा है कि गोशाला की बदहाली से जुड़ा वीडियो पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रधान-सचिव की भी तय हुई जिम्मेदारी
जांच रिपोर्ट में मृत गोवंशों के शव निस्तारण में देरी के लिए ग्राम प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी भी तय की गई है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शासन की सख्त नजर, आगे और कार्रवाई के संकेत
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण चल रहा है और आगे और अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
