नई दिल्ली/बरेली : देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में 27 अप्रैल, 2024 की सुबह जो हुआ, उसने इंसानियत, साहस और बलिदान की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। मिलनसार अपार्टमेंट में सुबह करीब 5:30 बजे शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग में इंजीनियरिंग के दो छात्र आर्यन गुप्ता और अनुपम कस्तूरिया ऊपरी मंज़िल पर फंस गए थे। चारों तरफ आग की लपटें, धुएं का गुबार और चीख-पुकार, लेकिन उसी वक्त सामने आए एक आम नागरिक, जो हीरो साबित हुए-सुमित यादव की इसी अद्वितीय वीरता और मानवता को देखते हुए अब भारत की राष्ट्रपति महोदया ने उन्हें ‘उत्तम जीवन रक्षक पदक’ प्रदान करने की अनुमति दी है।
दरवाज़ा तोड़कर जलती आग में कूद पड़ा एक इंसान
स्थिति की भयावहता को समझते हुए भी सुमित यादव ने अपने जीवन की परवाह किए बिना अपार्टमेंट का दरवाज़ा तोड़ा। चेहरे को बचाने के लिए सिर्फ एक छोटा फायर सिलेंडर साथ लिया और सीधे आग के बीच प्रवेश कर गए। उनका एक ही लक्ष्य था, अपने दोनों साथियों को ज़िंदा बाहर निकालना।
45 मिनट तक मौत से संघर्ष
आग में फंसे छात्रों में से अनुपम कस्तूरिया को सुमित यादव ने शुरुआती प्रयास में बाहर निकाल लिया, लेकिन दूसरा छात्र आर्यन गुप्ता, जो शारीरिक रूप से अधिक स्वस्थ थे, अत्यधिक घबराहट के कारण बाहर निकलने में असमर्थ हो रहे थे। आग, धुआं और दम घोंट देने वाला माहौल, इन सबके बीच सुमित यादव ने लगभग 45 मिनट तक संघर्ष किया। आखिरकार उन्होंने आर्यन को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इस दौरान सुमित यादव खुद गंभीर रूप से झुलस गए।
खुद ज़ख्मी, फिर भी ज़िंदगी की लड़ाई लड़ी
सुमित यादव को तत्काल महाराजा अग्रसेन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। इसके बाद सफदरजंग अस्पताल और फिर बरेली के ईशान हॉस्पिटल में महीनों तक उनका उपचार जारी रहा। शारीरिक पीड़ा के बावजूद उनके हौसले कभी नहीं टूटे।पूरे देश ने सराहा अदम्य साहस इस घटना के बाद पूरे देश में सुमित यादव की बहादुरी की चर्चा हुई।विभिन्न सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर उन्हें सम्मानित किया गया। उन्हें “आम नागरिक का असाधारण साहस” कहकर सराहा गया।
राष्ट्रपति ने दी ‘उत्तम जीवन रक्षक पदक’ की अनुमति

सुमित यादव की इसी अद्वितीय वीरता और मानवता को देखते हुए अब भारत की राष्ट्रपति महोदया ने उन्हें ‘उत्तम जीवन रक्षक पदक’ प्रदान करने की अनुमति दी है। यह सम्मान उन नागरिकों को दिया जाता है, जो अपने प्राणों की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाते हैं।देशभर में खुशी और गर्व का माहौल
इस घोषणा के बाद देशभर में खुशी की लहर है। लोग सुमित यादव को आज के दौर का सच्चा हीरो बता रहे हैं, जिसने यह साबित कर दिया कि वीरता किसी पद, वर्दी या पहचान की मोहताज नहीं होती, बल्कि इंसान के भीतर के साहस से जन्म लेती है।
