बरेली : आल इंडिया मजलिस -ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पार्टी ने बरेली में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान में गंभीर अव्यवस्थाओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन AIMIM जिलाध्यक्ष असलम एडवोकेट और नदीम के नेतृत्व में दिया गया। जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे। वोटर लिस्ट अभियान में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया। बोले – कई क्षेत्रों में BLO अभी तक घर- घर नहीं पहुँचे, कई मतदाताओं के पास 2003 के वोटर कार्ड मौजूद, लेकिन नाम वर्तमान वोटर लिस्ट से गायब। हजारों लोग नए पते पर रह रहे हैं,लेकिन पुरानी सूची में नाम ढूँढने पर भी नहीं मिल रहा है। घनी आबादी, गरीब बस्तियाँ और मज़दूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है। कई मतदाताओं ने शिकायत की कि “वोटर लिस्ट में पिता का नाम ही दर्ज नहीं। AIMIM ने कहा कि इस तरह की लापरवाही लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
SIR की कम समय सीमा बनी सबसे बड़ी समस्या
ज्ञापन में कहा गया कि SIR अभियान के लिए निर्धारित समय अत्यंत कम है। इसका असर सबसे ज्यादा BLO’s पर पड़ रहा है।।भारी कार्यभार, समय की कमी, अत्यधिक तनाव, AIMIM ने दावा किया कि कई जिलों में BLO’s की आत्महत्या, हार्ट अटैक और मानसिक तनाव से मौत जैसे मामले भी सामने आए हैं, जो स्थिति की भयावहता को दिखाते हैं। बोले – काफी लोग बाहर काम करते हैं। उनको छुट्टियां नहीं मिल रही है। बीएलओ से जल्दबाजी में काम कराया जा रहा है। इतनी जल्दबाजी किस बात की है।
गरीब, अशिक्षित और मज़दूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
AIMIM के अनुसार कि गरीब और अनपढ़ लोग फॉर्म ठीक से भर नहीं पा रहे हैं। ईंट-भट्ठों और बाहर दैनिक मजदूरी करने गए लोग फॉर्म भर ही नहीं पा रहे हैं। परिणामस्वरूप हजारों लोग वोट डालने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। AIMIM ने इसे अत्यंत गंभीर और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।
AIMIM की मांग- SIR अभियान की समय सीमा 6 माह बढ़ाई जाए
AIMIM जिलाध्यक्ष ने कहा-“जब तक SIR की समय सीमा कम से कम 6 माह नहीं बढ़ाई जाएगी,तब तक सभी पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से शामिल नहीं हो सकेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि अभियान की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी नागरिक अपने अधिकार से वंचित न हो।
ज्ञापन देने पहुंचे कार्यकर्ता
ज्ञापन सौंपने के दौरान पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे, और उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारू और निष्पक्ष रूप से लागू करने की मांग की।
