ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर अंजुमन गौसो रजा टीटीएस ने निकाला जुलूस,उर्स-ए-गौसिया में उमड़े अकीदतमंद, 2:38 बजे 886वां कुल शरीफ अदा
बरेली : ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर बड़े पीर हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी बगदादी गौस-ए-पाक की याद में गुरुवार को शहर के सैलानी रजा चौक से जुलूस-ए-गौसिया निकाला गया।अंजुमन गौसो रजा (टीटीएस) सैलानी के तत्वावधान में निकाले गए जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने हिस्सा लिया। रंग-बिरंगी पोशाक में शामिल अंजुमनों के लोग ‘या गौस’ की सदाएं बुलंद करते हुए आगे बढ़े। जुलूस दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादानशीन व जुलूस के बानी मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) की कयादत में निकाला गया। जुलूस आयोजकों हाजी शारिक नूरी, अफजलुद्दीन और वामिक रजा समेत अन्य लोगों ने मुफ्ती अहसन मियां और अल्हाज मोहसिन हसन खान की दस्तारबंदी कर स्वागत किया।इसके बाद मुफ्ती अहसन मियां ने मुजाहिद रजा को गौसिया परचम सौंपकर जुलूस को रवाना किया। कार्यक्रम का आगाज मुफ्ती फुरकान रजा ने किया, जबकि दुआ हाफिज अजहर रजा ने कराई। इस बार अंजुमन में डीजे पर पाबंदी रही।
मुफ्ती अहसन मियां ने सच्चाई और सब्र पर दिया जोर

इस मौके पर मुफ्ती अहसन मियां ने गौस-ए-पाक की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मुसलमानों को हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए हक पर कायम रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुश्किल और दुश्वारियां आने पर भी सच और सब्र का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने मजहब पर कायम रहते हुए अल्लाह और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। मौजूदा दौर का जिक्र करते हुए।उन्होंने कहा कि हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते और दौर बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि हर अंधेरी रात के बाद उजाला आता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम किसी पर जुल्म करने की इजाजत नहीं देता और न ही जुल्म सहने की।
अंजुमनों ने की शिरकत, रास्ते में स्वागत

जुलूस का संचालन हाजी शारिक नूरी ने किया। मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने आला हजरत का शेर पढ़कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। मौलाना अख्तर हुसैन ने भी खिराज पेश किया। जुलूस में सबसे आगे अंजुमन गुलामने ताजुशरिया चली। इसके बाद अन्य अंजुमनों ने भी शिरकत की। जुलूस अपने कदीमी मार्गों से आगे बढ़ा। जुलूस सैलानी रजा चौक, मुन्ना खान का नीम, साजन पैलेस और जगतपुर होकर आगे बढ़ा। इसके बाद काकर टोला से होकर दरगाह शाहदाना वली पर हाजिरी दी गई। देर रात जुलूस वापस सैलानी रजा चौक पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ।आयोजकों के मुताबिक रास्ते में जगह-जगह लोगों ने फूलों से जुलूस का स्वागत किया। इस दौरान सबील और लंगर भी तकसीम किया गया।
सुबह महफिल और फातिहा का आयोजन
जुलूस से पहले सुबह जुलूस आयोजक हाजी शारिक नूरी के आवास पर महफिल का आयोजन किया गया। इसमें कुरानख्वानी के बाद नात और मनकबत पेश की गई। इसके बाद तोशा शरीफ की फातिहा हुई।
डीजे रहित जुलूस के लिए अंजुमनों का शुक्रिया
अंजुमन गौस ओ रजा टीटीएस के सदर हाजी शारिक नूरी और सेक्रेटरी अजमल नूरी ने डीजे।रहित जुलूस निकालने में सहयोग करने वाली सभी अंजुमनों का शुक्रिया अदा किया। जुलूस की व्यवस्था में राशिद अली खान, अजमल नूरी, आजम तहसीनी, परवेज नूरी, नासिर कुरैशी, तनवीर तहसीनी, शाहिद नूरी, शोएब रजा, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, हाजी जावेद खान, अब्दुल माजिद अली, फिरोज खान, मंजूर रजा, इरशाद रजा, सय्यद माजिद, शान रजा, सय्यद एजाज, यूनुस गद्दी, नईम नूरी, साकिब रजा, साजिद रजा,नोमान खान, हस्सान रजा खान, शारिक बरकाती, इमरान खान, तारिक सईद, आलेनबी, इशरत नूरी, सैफ खान, अशमीर रजा, सबलू अल्वी, आरिफ नूरी, काशिफ रजा, मुस्तकीम नूरी,हाजी अजहर बेग, जीशान चिश्ती, तनवीर रजा, शमी खान, अजमल खान, शाहनवाज रजा,अबु बकर, हाजी शकील रजा, नाजिम रजा, इमरान साबरी, सुहैल रजा, शाद रजा, अरवाज रजा आदि शामिल रहे।
उर्स-ए-गौसिया में उमड़े अकीदतमंद, 2:38 बजे 886वां कुल शरीफ अदा

शहर के किला स्थित फूटा दरवाजा में चल रहे उर्स -ए-गौसिया के तीसरे दिन बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे।मस्जिद नोमहला शरीफ और झंडे शरीफ पर ‘गिलाफ-ए-गौसिया’ का दीदार कराया गया। उलमा ने गौस-ए-आजम की तालीमात और पाकीजा जिंदगी पर रोशनी डाली। देर रात 2:38 बजे 886वें कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। खुसूसी दुआ में देश में अमन, मोहब्बत और खुशहाली के साथ पूरी इंसानियत की सलामती की दुआ मांगी गई। कमेटी के सचिव फराज मियां ने बताया कि 25 सितंबर को दोपहर 2:38 बजे हजरत सय्यद मीरवतन रहमतुल्लाह अलैह के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी।
