बरेली: पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पहले सुनारों और व्यापारियों का भरोसा जीतता था और फिर नकली सोने के आभूषण व मोहरें देकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम देता था। थाना किला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर नकली सोने के पेंडल और आभूषणों के जरिए करीब 20 लाख रुपये की नकदी और कीमती जेवरात हड़पने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकली आभूषण, फर्जी आधार कार्ड, मोबाइल फोन और नकदी बरामद की है।
भरोसा जीतकर की लाखों की ठगी
पुलिस के अनुसार मोहल्ला जकाती निवासी विपिन कुमार रस्तोगी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उन्हें विश्वास में लेकर 190 ग्राम के 19 नकली सोने के पेंडल असली बताकर दिए और बदले में करीब 20 लाख रुपये नकद, चांदी की पायल, चांदी की चेन, सोने की अंगूठियां समेत अन्य कीमती आभूषण ले गए। शिकायत के आधार पर थाना किला में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सीडीआर और सर्विलांस की मदद से आरोपियों की पहचान की गई।
महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने गश्त के दौरान श्मशान भूमि फाटक के पास मिट्टी के टीले से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के भरतपुर निवासी महेंद्र, सुरेश और अलवर निवासी बबली उर्फ बब्बू शामिल हैं। जांच में सामने आया कि मुकदमे में नामित भगवान सिंह का वास्तविक नाम महेंद्र है, जो फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
नकली सोने की मोहरें, फर्जी आधार कार्ड और नकदी बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 11 पीली धातु के पेंडल, 4 नकली सोने की मोहरें, एक सफेद धातु की चेन, चार चूड़ियां, एक अंगूठी, एक फर्जी आधार कार्ड, छह डायरियां, तीन मोबाइल फोन और 10,550 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। बरामदगी के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में अन्य धाराओं की भी बढ़ोत्तरी की है। पुलिस का कहना है कि बरामद सामान का परीक्षण कराया जा रहा है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
ऐसे चलता था ठगी का पूरा खेल
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अलग-अलग शहरों में सुनारों और व्यापारियों को निशाना बनाते थे। शुरुआत में असली आभूषण गिरवी रखकर भरोसा जीतते थे और बाद में नकली धातु पर सोने की परत चढ़ाकर उसे असली बताकर बेच देते थे। इस तरह वे लोगों से नकदी और जेवरात हासिल कर लेते थे। पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था और ठगी से मिली रकम को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अन्य जिलों में भी कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
