छात्रों ने ‘जश्न-ए-आज़ादी और मुस्लिम नौजवानों की जिम्मेदारी’ विषय पर लिखे निबंध, संविधान, शिक्षा और विज्ञान पर उलेमा का जोर
बरेली : स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में दरगाह आला हज़रत स्थित मदरसा मंज़रे इस्लाम में शुक्रवार को छात्रों के बीच ‘जश्न-ए-आज़ादी और मुस्लिम नौजवानों की जिम्मेदारी’ विषय पर इनामी निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा के प्रधानाचार्य मुफ्ती मोहम्मद आकिल रजवी ने की। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लेकर राष्ट्र निर्माण, शिक्षा और युवाओं की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुफ्ती सलीम बरेलवी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि देश की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर गंभीरता से विचार करने का भी समय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा और ‘विकसित भारत-2047’ का लक्ष्य केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश के भविष्य का व्यापक विज़न है।
देश के विकास में मुस्लिम युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
मुफ्ती अख्तर रजवी ने कहा कि विजन इंडिया-2047 एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय नीति की अवधारणा है। इसका उद्देश्य भारत को आर्थिक रूप से मजबूत, वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाना है। मुफ्ती जमील ने कहा कि देश के विकास में मुस्लिम युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से अपनी बौद्धिक, रचनात्मक और उद्यमशील क्षमता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया। मुफ्ती मोइन बरकाती ने कहा कि इस्लाम में ज्ञान को सर्वोच्च महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि कुरआन की पहली वह़्य “इक़रा” (पढ़ो) से शुरू होती है, जो शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने का संदेश देती है।उन्होंने इतिहास में विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में इस्लामी सभ्यता के योगदान का भी उल्लेख किया।
शिक्षा भविष्य का सबसे बड़ा निवेश
कारी अब्दुर्रहमान ने शिक्षा को भविष्य का सबसे बड़ा निवेश बताया, जबकि मास्टर कमाल ने कहा कि वर्तमान दौर में मुस्लिम समाज को आधुनिक शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।मौलाना मुजीब ने छात्रों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस रिसर्च, बायोटेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, इनोवेशन लैब और स्टार्टअप संस्कृति से जुड़कर देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए।
संविधान के मूल्यों, और सौहार्द मजबूत बनाने पर जोर
मुफ्ती कलीम ने संविधान के मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि सभी नागरिकों के समान अधिकारों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना प्रत्येक युवा का कर्तव्य है। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को उपहार और तिरंगा झंडा वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
