दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन अहसन मियां की सदारत में होगा उर्स-ए-हामिदी
बरेली : इस्लामी दुनिया में अपनी इल्मी और रूहानी पहचान रखने वाली दरगाह आला हज़रत में हुज्जतुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रज़ा खां साहब का 85वां उर्स-ए-हामिदी इस साल 08 और 09 नवम्बर को दरगाह परिसर में अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खां (सुब्हानी मियां) ने जारी की। उर्स के साथ ही, आला हज़रत द्वारा स्थापित ऐतिहासी और मशहूर मदरसा मंज़र-ए-इस्लाम का 122वां दीक्षांत समारोह (दस्तारबंदी) भी आयोजित होगा। इसी दौरान मुफस्सिर -ए- आज़म हज़रत इब्राहीम रज़ा खां (जिलानी मियां) साहब के 62वें कुल शरीफ की रस्म भी अदा की जाएगी। सभी कार्यक्रमों की सदारत सज्जादानशीन बदरूश्शरिया मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) करेंगे, और तमाम इंतेज़ामात की निगरानी सय्यद आसिफ मियां करेंगे।
क़ुरानख़्वानी से उर्स का आगाज
दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स-ए-हामिदी की शुरुआत 08 नवम्बर, नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद क़ुरानख़्वानी से होगी। सुबह 8 बजे मदरसे में ख़त्म-ए-बुख़ारी शरीफ की महफ़िल होगी। 10:30 बजे हज़रत जिलानी मियां के कुल शरीफ़ की रस्म। रात में नमाज़ -ए- ईशा के बाद तहरीरी व तकरीरी मुकाबले, जो रातभर जारी रहेंगे। 09 नवंबर को दिनभर नात, मनक़बत और इल्मी-नशिस्तें। रात 9 बजे मुख्य प्रोग्राम शुरू होगा। दरगाह के मुफ्ती सलीम नूरी दरगाह प्रमुख का पैग़ाम पढ़ेंगे। इसके बाद उलेमा हुज्जतुल इस्लाम की शख्सियत और खिदमात पर रौशनी डालेंगे। रात 10:35 बजे हुज्जतुल इस्लाम के कुल शरीफ़ की रस्म और मुफ्ती अहसन मियां की खास दुआ होगी।
छात्रों की होगी दस्तारबंदी
इस साल मंज़र-ए-इस्लाम से 22 मुफ़्ती, 80 आलिम, 87 कारी, 03 हाफ़िज यानी कुल 192 तालिबे-इल्म अपने इख्तितामाती दर्स के बाद दस्तारबंदी हासिल करेंगे। दस्तार (पगड़ी/ग्रेजुएशन) सुब्हानी मियां और अहसन मियां के हाथों दी जाएगी।
