20 से अधिक पुलिस मुठभेड़ों पर सवाल, यूपी राज्य मानवाधिकार आयोग ने मांगी जांच
लखनऊ/बरेली : इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ.गजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बरेली बवाल के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ और ‘ऑपरेशन खलास’ को लेकर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों पर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (UPSHRC) ने कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने आयोग में शिकायत दाखिल करते हुए कहा कि बरेली घटना के बाद पुलिस ने 48 घंटे के भीतर 20 से अधिक मुठभेड़ें कीं, जिनमें कई व्यक्तियों को जान-बूझकर पैरों में गोली मारी गई, ताकि वे स्थायी रूप से अपंग (लंगड़ा) हो जाएँ। इसी कारण इस अभियान का नाम “ऑपरेशन लंगड़ा” चर्चाओं में आया।।शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में पीड़ित पहले से पुलिस हिरासत में थे, बाद में उन्हें “भागने का प्रयास” बताकर नकली मुठभेड़ में घायल दिखाया गया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) तथा मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 का उल्लंघन है।
आयोग ने शिकायत पर क्या कहा?
उन्होंने बताया कि शिकायत का संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने आदेश दिया कि कि शिकायत की प्रति प्रमुख सचिव गृह, उत्तर प्रदेश को भेजी जाए,ताकि मामले की जांच कर विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अभी इन आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। यानि- सरकार को अब इस मामले पर जवाब देना होगा। डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव ने आयोग के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा “यह आदेश पुलिस मुठभेड़ों में जवाबदेही तय कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पारदर्शी जांच होगी तो भविष्य में मानवाधिकार उल्लंघन पर अंकुश लगेगा।”
