बिहार चुनाव में महागठबंधन में दरार, सीट बंटवारे पर मचा घमासान
बिहार : विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर असमंजस की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है। सीट बंटवारे को लेकर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, जिससे गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी साफ झलक रही है। वहीं, कई सीटों पर स्थिति और भी पेचीदा होती दिख रही है, क्योंकि अलग-अलग दलों ने एक ही सीट पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे “गठबंधन के अंदर ही मुकाबला” जैसी स्थिति बन गई है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने किया अलग चुनाव लड़ने का ऐलान
महागठबंधन के भीतर जारी खींचतान के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह बिहार की छह सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सीट बंटवारे में उसे सम्मानजनक स्थान नहीं दिया गया, इसलिए उसने यह फैसला लिया। इस कदम से महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राजद पर मनमानी टिकट वितरण के आरोप
गठबंधन के सबसे बड़े दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर सहयोगी दलों ने सीट बंटवारे में मनमानी करने का आरोप लगाया है। राजद ने राज्य की 243 सीटों में से कई पर बिना किसी समन्वय के अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, जिनमें कुछ सीटें कांग्रेस और वाम दलों के दावों से भी टकरा रही हैं। अभी तक राजद ने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन कई जिलों में टिकट बांटने का सिलसिला जारी है।
दो चरणों में होगा चुनाव, 14 नवंबर को आएगा नतीजा
बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण के तहत 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 122 सीटों के लिए 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। मतगणना 14 नवंबर को होगी। इस बीच, महागठबंधन की अंदरूनी कलह को देखते हुए बीजेपी और एनडीए खेमे ने इसे अपने लिए “राजनीतिक अवसर” के रूप में देखा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महागठबंधन सीट बंटवारे पर जल्द सहमति नहीं बनाता, तो कई सीटों पर वोटों का बिखराव होगा, जिससे एनडीए को फायदा मिल सकता है। वहीं, विपक्षी एकता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
