पटना/सिवान : बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, और वरिष्ठ समाजवादी नेता अवध बिहारी चौधरी से मंगलवार को ‘हम भारत के लोग’ के संयोजक एवं महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने उनके निवास स्थान पर मुलाकात की। इस मुलाकात को वर्तमान राजनीतिक हिंसा, सांप्रदायिकता और जातिवादी माहौल के बीच एक “ताज़ी हवा का झोंका” बताया गया। अवध बिहारी चौधरी जी ने अपने राजनीतिक जीवन की झलक साझा करते हुए बताया कि वे जेपी आंदोलन में भूमिगत रहे, और सिवान कॉलेज में महासचिव भी रहे। चंद्रशेखर जी के सहयोग से उन्हें टिकट मिला और तभी से उन्होंने सिवान की राजनीति में नेतृत्व किया। वे मंत्री भी रहे, और 17 महीने तक बिहार विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी रहे।
सामाजिक न्याय आंदोलन की जीवंत प्रदर्शनी

तुषार गांधी ने चौधरी के घर को समाजवादी और सामाजिक न्याय आंदोलन की “जीवंत प्रदर्शनी” बताया। यहां लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर और मुलायम सिंह यादव की तस्वीरें विचारों की समग्रता को दर्शाती हैं।
महात्मा गांधी की तस्वीर देखकर दिन की शुरुआत

अवध बिहारी चौधरी ने कहा कि “मैं प्रतिदिन महात्मा गांधी की तस्वीर देखकर दिन की शुरुआत करता हूं। इससे समाजवादी आंदोलन और सामाजिक न्याय के पुरखों की ऊर्जा मिलती है।”उन्होंने नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि “बिहार को बर्बाद करने वालों में नीतीश कुमार प्रमुख हैं।” वहीं उन्होंने लालू प्रसाद यादव की दृढ़ता को याद करते हुए कहा कि अगर लालू जी समझौता कर लेते तो, आज वे इतिहास पुरुष की श्रेणी में नहीं आते।
लालू के गुड़ तेजस्वी में

तुषार गांधी ने कहा कि उन्हें वही गुण तेजस्वी यादव में भी दिखते हैं। तुषार गांधी ने बताया कि कैसे नीतीश कुमार ने समाजवादी समागम में आरएसएस मुक्त भारत और नशा मुक्त समाज का संकल्प साझा किया था, जबकि वास्तविकता यह है कि “बिहार में शराब घर-घर बिक रही है।”उन्होंने चौधरी जी को मधु लिमये, मधु दंडवते और कर्पूरी ठाकुर की जन्मशताब्दी समारोह की जानकारी दी। इस पर चौधरी जी ने कहा कि “आज के समय में ऐसे नेता राजनीति में दुर्लभ हो गए हैं।”मुलाकात के दौरान अवध बिहारी चौधरी ने तुषार गांधी और उनके साथियों का शॉल देकर सम्मान किया और बिहार चुनाव के लिए एक वीडियो अपील भी जारी की।
लूटतंत्र आधारित राजनीति में चौधरी से मुश्किल
इस मौके पर तुषार गांधी ने कहा कि आज की लूटतंत्र आधारित राजनीति में चौधरी जी से मिलना हमें रघुवंश प्रसाद सिंह और जगदानंद बाबू की याद दिलाता है।
