बुलंदशहर/बरेली: यूपी के बुलंदशहर जिले में एससी कोटे से शिक्षक की नौकरी पाने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है । जिसमें आरोपी की पोल उसकी पत्नी ने ही खोल दी। शिकायत पर तहसील और राजस्व विभाग की जांच में यह साफ हो गया कि सहायक अध्यापक केंद्रपाल ने ओबीसी होने के बावजूद फर्जी अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र बनवाकर नौकरी पाई थी।
जांच में क्या निकला सामने
बरेली की बहेड़ी तहसील के दौलतपुर निवासी केंद्रपाल ने 20 मई 2016 को सदर तहसील से धनगर जाति (SC) का जाति प्रमाणपत्र और जून 2019 में निवास प्रमाणपत्र बनवाया। दोनों दस्तावेज मोहल्ला जागृति नगर, ग्राम करगैना के पते पर जारी हुए थे, जबकि वह मूल रूप से बहेड़ी का निवासी है। बहेड़ी तहसीलदार की 8 जुलाई को जारी रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि केंद्रपाल ओबीसी वर्ग की गड़रिया जाति से है। उनके सगे भाई प्रेमपाल सिंह (शिक्षामित्र) के दस्तावेज भी ओबीसी वर्ग की पुष्टि करते हैं। गांव के प्रधान, कोटेदार और कई ग्रामीणों ने भी यही बयान दिया।
ऐसे मिली थी नौकरी
23 अक्टूबर, 2020 को केंद्रपाल ने फर्जी SC प्रमाणपत्र के आधार पर बुलंदशहर के पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज, रसूलगढ़ पहासू में अंग्रेजी के सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति पाई। फिलहाल वह बुलंदशहर के राजकीय हाईस्कूल बदरखासी खास पहासू में तैनात है।
पत्नी की शिकायत से खुला मामला
केंद्रपाल की पत्नी की ओर से की गई शिकायत पर डीआईओएस बुलंदशहर ने 4 जून 2025 को एसडीएम सदर, बरेली को पत्र भेजा था, जिसके बाद तहसील और राजस्व विभाग ने जांच शुरू की।
जानें आगे की कार्रवाई
तहसीलदार बहेड़ी भानु प्रताप ने पुष्टि की कि केंद्रपाल का SC प्रमाणपत्र फर्जी है, और कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बुलंदशहर के डीआईओएस को भेज दी गई है।
