तेजस्वी यादव का आरोप: हमारी योजना को अब NDA सरकार ने अपनाया, लेकिन आधा-अधूरा!
पटना/ लखनऊ : बिहार सरकार द्वारा आशा और ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद सूबे की सियासत गर्मा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे अपनी योजना बताते हुए एनडीए सरकार पर तंज कसा है। तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने जब स्वास्थ्य मंत्री थे, तब इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी थी, लेकिन नीतीश कुमार सरकार ने इसे 2 साल तक दबाकर रखा।
तेजस्वी बोले: “ये डर अच्छा है…”
तेजस्वी यादव ने तीखा हमला करते हुए कहा कि “हमारी मांगों और वादों से डर कर सरकार घुटनों पर आई है। लेकिन यह निर्णय भी आधा-अधूरा है। आशा-ममता कार्यकर्ताओं को सिर्फ प्रोत्साहन नहीं, मानदेय मिलना चाहिए। हमारी सरकार आएगी तो हम उन्हें मानदेय देंगे।”तेजस्वी ने मौजूदा सरकार को “नकलची, थकी-हारी और विजन रहित” बताते हुए कहा कि ये लोग सत्ता जाते देख अब हमारी घोषणाओं की कॉपी कर रहे हैं।
नीतीश कुमार ने किया था बड़ा ऐलान
सीएम नीतीश कुमार ने बुधवार को आशा और ममता कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की घोषणा करते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को अब 1,000 की जगह 3,000 प्रति माह प्रोत्साहन राशि मिलेगी। ममता कार्यकर्ताओं को प्रति डिलीवरी 600, पहले यह 300 था। उन्होंने कहा कि इससे गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा।
क्रेडिट की सियासत: किसका फैसला, किसकी नकल?
तेजस्वी ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि आंगनवाड़ी सेविका, सहायिका और रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की उनकी पुरानी मांग भी सरकार को जल्द माननी पड़ेगी। उन्होंने याद दिलाया कि अपने 17 महीने के कार्यकाल में उन्होंने विकास मित्र, शिक्षा मित्र, टोला सेवक और पंचायती राज प्रतिनिधियों का मानदेय पहले ही बढ़ाया था।
