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जब बरेली कॉलेज बना क्रांति का गढ़, शिक्षक और छात्र की कुर्बानी के इतिहास की अनकही दास्तां
जब भी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की बात होती है, तो दिल्ली, लखनऊ या कोलकाता के केंद्रों का ज़िक्र होता है। मगर, देश की असली क्रांति उन गली-कूचों, स्कूलों और कॉलेजों में पनपी, जहाँ अंग्रेज़ों के खिलाफ बोलना भी गुनाह माना जाता था। बरेली कॉलेज एक ऐसा ही क्रांतिकारी केंद्र था। यहां शिक्षक कुतुब शाह और छात्र जैमीग्रीन ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर आज़ादी के बीज बोए। जंग- ए-आजादी के नायक मौलाना हसरत मोहानी की किताब हकीकत -ए-आजादी में कुतुब शाह के बारे में लिखा है। बताया गया है कि 1857 के संग्राम के दौरान बरेली कॉलेज के फारसी विभाग में पढ़ाने वाले शिक्षक कुतुब शाह सिर्फ एक अध्यापक नहीं थे, बल्कि एक निर्भीक क्रांतिकारी थे। उन्होंने रुहेला सरदार नवाब खान बहादुर ख़ान और मौलवी महमूद हसन के क्रांतिकारी फरमानों और लेखों को प्रेस में छपवाकर पूरे इलाके में बांटा। इन गतिविधियों का उल्लेख स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी अभिलेखों और “1857 का जनविद्रोह” (लेखक: अमर फ़रीदी) जैसे दस्तावेज़ों में भी मिलता है।
ब्रिटिश हुकूमत की चेतावनी को ठुकराया
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https://youtu.be/V9yzUzy4RqI?si=2z1f7hdj78CsFVgj
जब ब्रिटिश सरकार ने चेतावनी दी, तो कुतुब शाह ने उसे ठुकरा दिया। अंग्रेज़ों ने उन्हें गिरफ्तार कर फांसी की सज़ा सुनाई, लेकिन नवाब खान बहादुर खान की ओर से भेजे गए वकीलों ने आख़िरी वक्त पर सज़ा को काला पानी में बदलवा दिया। उन्हें अंडमान-निकोबार की कुख्यात सेल्युलर जेल में भेजा गया। वहाँ उन्हें शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। अंग्रेजों ने उनकी शहादत के बाद उनका शव तक परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया। वे गुमनाम ही सही, मगर आज़ादी की लौ में जलकर अमर हो गए।
छात्र जैमीग्रीन इंजीनियर से योद्धा और फिर फांसी का फंदा
बरेली कॉलेज के छात्र जैमीग्रीन, मूल रूप से रामपुर के रहने वाले थे। वे बेगम हज़रत महल के चीफ इंजीनियर बने और सिकंदर बाग के युद्ध में वीरता से लड़े। मगर, बाद में उन्नाव में ब्रिटिश सेना की जासूसी करते वक्त पकड़े गए। उन्हें अदालत ने बिना लंबी सुनवाई के फांसी पर चढ़ा दिया।
जब छात्रों ने प्रिंसिपल को मारा
इतिहास में दर्ज है कि बरेली कॉलेज के छात्रों ने अपने ही कॉलेज के ब्रिटिश प्रिंसिपल डॉ. कारलोस बक को उनकी नीतियों और क्रूरता के चलते मौत के घाट उतार दिया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा का केंद्र रहा बरेली कॉलेज उस दौर में क्रांति की प्रयोगशाला बन चुका था।
