दो पैन कार्ड मामले में 11 महीने 14 दिन जेल में रहने के बाद पूर्व विधायक की रिहाई, बोले- पिछले आठ साल में जो हमारे साथ हुआ, शायद किसी के साथ नहीं हुआ होगा
रामपुर: दो पैन कार्ड मामले में 11 महीने 14 दिन जेल में रहने के बाद पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम शनिवार को रिहा हो गए। जेल से बाहर आते ही उन्होंने पिछले आठ सालों के कानूनी संघर्ष और परिवार के साथ हुई कार्रवाई को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की। अब्दुल्ला ने कहा कि पिछले आठ सालों में उनके परिवार के साथ जो कुछ हुआ, शायद किसी और के साथ ऐसा नहीं हुआ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भैंस, बकरी और मुर्गी चोरी तक के मुकदमे दर्ज किए गए। आजम खान को मिली सजा का जिक्र करते हुए भी उन्होंने कई सवाल उठाए।
‘गलत जन्मतिथि ठीक कराने की सजा भुगत रहा हूं’
अब्दुल्ला आजम ने कहा कि वह बदनसीब हैं, जिनकी पैदाइश का वीडियो साक्ष्य मौजूद है। अस्पताल का रिकॉर्ड है और मां की मैटरनिटी लीव से लेकर हर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध है। इसके बावजूद वह पिछले सात साल से केवल इस बात की सजा भुगत रहे हैं कि उन्होंने अपनी गलत जन्मतिथि ठीक क्यों कराई। उन्होंने कहा कि वह अपनी बात साबित नहीं कर सके। इसकी वजह बताते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “क्योंकि मेरा नाम अब्दुल्ला है। अगर मेरा नाम अब्दुल्ला नहीं होता तो शायद मैं इस सच को साबित कर लेता।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास अधिकार नहीं हैं और उनके साथ इंसानों जैसा व्यवहार नहीं किया गया।
‘आजम साहब ने बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम किया, यही गलती हो गई’
पूर्व विधायक ने कहा कि उन्हें समाज के लिए इतना बड़ा खतरा बताया जा रहा है कि जेल से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अदालतों के चक्कर लगाने और तारीखों के बाद उन्हें जमानत मिली। इसके बाद 80 साल के एक व्यक्ति की रिहाई का इंतजार करने के लिए सैकड़ों लोग जेल के बाहर मौजूद थे। अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी भीड़ किसी अपराधी और भ्रष्टाचारी के लिए खड़ी थी? उन्होंने आजम खान का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे एक गलती हो गई कि उन्होंने रामपुर के बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम कर दिया। उन्होंने उस रामपुर का भविष्य संवारने का सपना देखा, जिसकी साक्षरता दर कभी 22 प्रतिशत थी।
‘हमें उस ख्वाब और अपने नाम की सजा मिली’
अब्दुल्ला आजम ने कहा कि आजम खान ने उनके बेहतर भविष्य का सपना देखा था और शायद यही उनकी गलती बन गई। उनका कहना था कि अगर आजम खान भी दूसरे विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की तरह केवल अपने लिए जिंदगी गुजारते तो शायद उन्हें सजा नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें आजम और अब्दुल्ला नाम होने की सजा मिली है। अब्दुल्ला के इस बयान के बाद रामपुर की राजनीति में उनके परिवार के कानूनी संघर्ष और जेल से रिहाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
