बहसूमा के अकबरपुर सादात गांव में अप्रैल 2025 में हुई थी अमित की हत्या, अभियोजन ने बताया- पत्नी ने पकड़ा था हाथ और प्रेमी ने दबाया था गला; 12 गवाहों के बयान के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के बहसूमा क्षेत्र स्थित अकबरपुर सादात गांव के चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने 16 अक्टूबर को सजा सुनाई। मामले में अमित की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड दिया गया। इससे पहले सात अक्टूबर को अपर जिला जज, कोर्ट संख्या-12 के न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने दोनों को हत्या का दोषी ठहराया था। सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से अदालत लाया गया। अमित की मां मुनेश ने अदालत से दोनों को मृत्युदंड देने की मांग की थी।
पत्नी ने पकड़ा था हाथ, प्रेमी ने दबाया था गला
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 की रात रविता ने अपने पड़ोसी और प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अमित की हत्या की थी। पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र में कहा गया कि वारदात के दौरान रविता ने अमित का हाथ पकड़ रखा था, जबकि अमरदीप ने उसका गला दबाया था। अभियोजन के अनुसार, हत्या के बाद घटना को सांप के डसने से हुई मौत दिखाने और साक्ष्य छिपाने के लिए शव के पास चारपाई पर सांप छोड़ दिया गया था। अगले दिन सुबह अमित का पांच वर्षीय बेटा अनिकेत उसे जगाने पहुंचा। काफी कोशिश के बाद भी जब अमित नहीं उठा तो बच्चे ने शोर मचाया। परिजनों के मौके पर पहुंचने पर अमित की कमर के नीचे सांप दबा मिला। पिंटू और सुखपाल ने सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद कर दिया। अमित के चेहरे, गर्दन और नाक पर चोट के सात निशान मिले थे। पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
12 गवाहों की गवाही बनी अहम, सपेरे ने भी की पहचान
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 लोगों ने गवाही दी। अमित के भाई मोनू और मां मुनेश प्रमुख गवाह रहे। उन्होंने अदालत में बताया कि हत्या वाली रात उन्होंने अमरदीप को घर में प्रवेश करते देखा था। सपेरे कीर्तन की गवाही भी अभियोजन के लिए अहम रही। उसने अदालत में अमरदीप की पहचान करते हुए बताया कि अमरदीप ने माता के जागरण में पूजा के लिए उससे एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। वहीं, अमरदीप के चाचा ने बचाव पक्ष की ओर से गवाही देते हुए दावा किया कि हत्या वाले दिन अमरदीप अपने मामा के घर पर था। रविता की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य सुनने के बाद सात अक्टूबर को दोनों को हत्या का दोषी करार दिया और 16 अक्टूबर को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अमित की हत्या के मामले में अदालत के इस फैसले के बाद परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है। मामले में अभियोजन की ओर से पेश गवाहों और साक्ष्यों ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
