नई दिल्ली : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने सोमवार को दिल्ली में मार्च निकाला। बाराखंभा रोड से उच्चतम न्यायालय तक निकाले गए इस मार्च में विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए। विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग पर कथित वोट चोरी और मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाने के आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
खरगे, राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेता हुए शामिल

इंडिया गठबंधन के मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल हुए। इसके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कांग्रेस नेता सचिन पायलट, हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी मार्च में भाग लिया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत और अरविंद सावंत, झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेता महुआ माझी तथा तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा समेत विपक्षी दलों के अन्य नेता भी मौजूद रहे।
एसआईआर पर रोक और मतदाता सूची की जांच की मांग
विपक्षी गठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने और कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए नामों के मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में अनियमितताओं से पात्र मतदाताओं के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। मार्च के दौरान सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और उन्हें पद से हटाने की मांग की। गठबंधन का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित वोट चोरी से जुड़े आरोप विपक्षी गठबंधन के दावे हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
मार्च के दौरान कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव व्यवस्था के खिलाफ बड़ा आंदोलन है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तेमाल देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के लिए करने का आरोप लगाया। वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की लड़ाई भारत के मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के खिलाफ नहीं है। उनके अनुसार, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों को कमजोर किया जा रहा है। ये आरोप कांग्रेस नेता ने प्रदर्शन के दौरान लगाए।
चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता, मताधिकार की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं। विपक्ष ने मांग की कि एसआईआर से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। विपक्षी गठबंधन ने इन मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत बताई है। फिलहाल इस पूरे मामले में विपक्ष की मांगों और आरोपों के बीच चुनाव आयोग की प्रक्रिया तथा संबंधित आधिकारिक तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। एसआईआर पर रोक, कथित वोट चोरी की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आगे की स्थिति संबंधित संस्थाओं के निर्णयों पर निर्भर करेगी।
