पीड़ितों के वकील ने ट्रायल जज पर मामलों को अपने पास ट्रांसफर करने और आरोपियों को बरी करने का लगाया था आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह बाद सुनवाई तय की
नई दिल्ली: 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से उचित कार्रवाई करने को कहा। अदालत ने हाई कोर्ट की ओर से मामले में की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराने को कहा है। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस संवेदनशील मामले के लिए जल्द से जल्द नया सरकारी वकील नियुक्त करने का भी निर्देश दिया।
ट्रायल जज पर क्या लगाए गए आरोप?
पिछले महीने पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रायल जज के आचरण को लेकर अदालत के सामने गंभीर आरोप रखे थे। उनका दावा था कि पीठासीन अधिकारी ने कई आपराधिक मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया और आरोपियों को बरी किया। इन आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले को देखने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा था। अदालत ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, सतर्कता शाखा के माध्यम से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट भेजने को भी कहा था, जिसमें मुख्य न्यायाधीश की ओर से की जाने वाली संभावित कार्रवाई की जानकारी हो।
हाई कोर्ट में प्रशासनिक समिति बनाने की दलील
सोमवार, 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रायल जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए प्रशासनिक समिति गठित करने की जरूरत है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 22 सितंबर 2026 के आदेश के पैरा तीन के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने फिलहाल आरोपों की सत्यता को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है और मामले में अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद करने का फैसला किया है।
आशीष मिश्रा के वकील ने प्रशांत भूषण पर उठाए सवाल
मामले में आरोपी आशीष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने प्रशांत भूषण की दलीलों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण को इस मामले से जुड़े कई लोगों को लेकर आपत्ति है, जिनमें ट्रायल जज, सरकारी वकील और आरोपी भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि ट्रायल जज मुख्य मामले में 130 से अधिक गवाहों में से 86 गवाहों के बयान दर्ज कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह ट्रायल जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर इस स्तर पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।
दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए तय की है। इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से की गई कार्रवाई और संबंधित रिपोर्ट अदालत के सामने आ सकती है।साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को मामले के लिए नया सरकारी वकील नियुक्त करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है।
6 अगस्त को आशीष मिश्रा को जमानत में राहत से किया था इनकार
इससे पहले 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया था। लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में 3 अक्टूबर 2021 को किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। मामले में आशीष मिश्रा आरोपी हैं और इस प्रकरण की सुनवाई अदालत में जारी है।
