बरेली में शव की गलत शिनाख्त का हैरान करने वाला मामला, मंशालाल समझकर किया गया अंतिम संस्कार,जांच में सामने आया कि शव पड़ोसी चंद्रिका सिंह का था
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में शव की गलत शिनाख्त का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इज्जतनगर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर मिले एक बुजुर्ग के शव की पहचान परिवार ने अपने 72 वर्षीय परिजन मंशालाल के रूप में की। पुलिस ने पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। लेकिन घटना के अगले ही दिन मंशालाल अचानक अपने घर पहुंच गए। उन्हें जिंदा देखकर परिवार के होश उड़ गए। इसके बाद पुलिस के सामने भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि आखिर जिस शव को मंशालाल समझकर अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था?
रेलवे ट्रैक पर मिला था क्षत-विक्षत शव
जानकारी के मुताबिक, 2 अक्टूबर को इज्जतनगर रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी। स्टेशन प्रबंधक की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। ट्रेन की चपेट में आने के कारण शव का चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। इसी दौरान रेलवे में गैंगमैन के पद पर कार्यरत केशव कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव की पहचान अपने पिता 72 वर्षीय मंशालाल के रूप में की। मंशालाल रेलवे से वीआरएस ले चुके हैं। परिवार की ओर से पहचान किए जाने के बाद पुलिस ने नियमानुसार पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया।
अगले दिन घर लौट आए मंशालाल
इस मामले में असली मोड़ 3 अक्टूबर को आया। मंशालाल अचानक अपने घर पहुंच गए। परिवार ने जब उन्हें सामने देखा तो सभी हैरान रह गए, क्योंकि परिवार एक दिन पहले ही उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार कर चुका था। इसके बाद केशव कुमार बैरियर वन चौकी पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि रेलवे ट्रैक पर मिला शव आखिर किसका था?
जांच में सामने आया पड़ोसी चंद्रिका सिंह का नाम
पुलिस ने दोबारा जांच शुरू की तो पता चला कि मंशालाल के पड़ोसी चंद्रिका सिंह यादव भी 2 अक्टूबर की सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे थे। चंद्रिका सिंह रेलवे से सेवानिवृत्त लोको पायलट थे। उनके परिजन भी उनकी तलाश कर रहे थे। पुलिस ने शव की फोटो, कपड़े और हुलिए के आधार पर दोबारा पहचान की प्रक्रिया कराई। इसके बाद शव की पहचान चंद्रिका सिंह के रूप में हुई।
दोनों की उम्र और हुलिया मिलता-जुलता था
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में मंशालाल और चंद्रिका सिंह दोनों की उम्र करीब 72 वर्ष थी और दोनों का हुलिया भी काफी मिलता-जुलता था। इसके अलावा ट्रेन की चपेट में आने से शव का चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इन्हीं परिस्थितियों में शुरुआती पहचान में गलती होने की बात सामने आई है। सीओ तृतीय शिवम आशुतोष के मुताबिक, रेलवे ट्रैक पर मिले शव की पहचान शुरुआत में केशव कुमार ने अपने पिता मंशालाल के रूप में की थी। बाद में मंशालाल के घर लौटने पर पुलिस ने दोबारा जांच की और फोटो, कपड़े तथा हुलिए के आधार पर शव की पहचान चंद्रिका सिंह के रूप में की।
चंद्रिका सिंह के परिवार को मिली घटना की जानकारी
चंद्रिका सिंह की पत्नी गिरजा देवी के मुताबिक, उनके पति 2 अक्टूबर की सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे। शनिवार को थाने पहुंचने पर परिवार को पूरे मामले की जानकारी मिली। इसके बाद फोटो, कपड़े और हुलिए के आधार पर शव की पहचान चंद्रिका सिंह के रूप में की गई। परिवार के मुताबिक, चंद्रिका सिंह के तीन बेटे हैं। उनके बड़े बेटे अखिलेश यादव चंडीगढ़ में निजी नौकरी करते हैं, जबकि आलोक यादव रेलवे में कार्यरत हैं। इसके बाद चंद्रिका सिंह का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया।
पुलिस कर रही पूरे मामले की जांच
पुलिस के अनुसार, दोनों व्यक्तियों के संबंध में घटना से पहले थाने में कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई गई थी। शुरुआती जानकारी में शव की गलत पहचान के पीछे दोनों बुजुर्गों की समान उम्र, मिलता-जुलता हुलिया और शव का क्षत-विक्षत होना प्रमुख वजह सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस मंशालाल को परिवार मृत समझकर अंतिम विदाई दे चुका था, वही अगले दिन सकुशल अपने घर लौट आए। वहीं, रेलवे ट्रैक पर मिले शव की बाद में पहचान उनके पड़ोसी और सेवानिवृत्त लोको पायलट चंद्रिका सिंह के रूप में हुई।
