बरेली : बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की ओर से शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ विकास संवाद आयोजित किया गया। BDA उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बैठक में करीब पांच प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें रोहिलखंड विश्वविद्यालय, डीपीएस बरेली और फ्यूचर यूनिवर्सिटी सहित अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में भवन निर्माण से संबंधित ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति, कंपाउंडिंग मानचित्र और भू-उपयोग रिपोर्ट प्राप्त करने में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्राधिकरण तथा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पर हुई चर्चा
विकास संवाद के दौरान शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने मानचित्र स्वीकृति और अन्य नियोजन संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर अपने सुझाव और समस्याएं सामने रखीं। BDA अधिकारियों ने संबंधित प्रक्रियाओं, आवश्यक दस्तावेजों और निर्धारित मानकों की जानकारी दी। अधिकारियों ने आवेदन पत्रों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूर्ण दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करने पर जोर दिया, ताकि मानचित्र स्वीकृति से जुड़े मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
फायर NOC से लेकर STP और पूर्णता प्रमाण-पत्र तक चर्चा
बैठक में शैक्षणिक भवनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी और वैधानिक विषयों पर भी चर्चा हुई। इनमें अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण-पत्र (Fire NOC), STP/WWTP, सुगम्यता प्रावधान, वैधानिक अनुपालन और पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रमुख रहे। संस्थानों के प्रतिनिधियों को इन प्रक्रियाओं से जुड़े आवश्यक मानकों और दस्तावेजों के संबंध में जानकारी दी गई। बैठक में संस्थानों की ओर से अपने विशिष्ट प्रकरणों से संबंधित समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखी गईं।
BDA और शिक्षण संस्थानों के बीच लगातार संवाद पर जोर
BDA उपाध्यक्ष ने प्राधिकरण और शैक्षणिक संस्थानों के बीच लगातार संवाद और बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। उद्देश्य यह है कि मानचित्र स्वीकृति और अन्य नियोजन संबंधी प्रकरणों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जा सके। बैठक के अंत में खुली चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों को अपनी विशिष्ट समस्याएं और सुझाव सीधे प्राधिकरण के समक्ष रखने का अवसर मिला। BDA की ओर से संबंधित मामलों में आवश्यक समन्वय और प्रक्रिया संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
