साबरमती रेलवे स्टेशन से एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन वाली ट्रेन की शुरुआत, डीजल खपत में करीब 40 प्रतिशत कमी और ईंधन लागत में बचत का अनुमान
अहमदाबाद: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने साबरमती मंडल में भारतीय रेलवे की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इन परियोजनाओं में कुल 1,472 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
यात्री सुविधा और सुरक्षा पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साबरमती मंडल में शुरू की गई विभिन्न रेलवे परियोजनाएं पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के साथ यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगी। अमित शाह ने साबरमती रेलवे स्टेशन से अपने पुराने जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली से यात्रा के दौरान वह कई बार साबरमती रेलवे स्टेशन पर उतर चुके हैं। उन्होंने लंबे समय बाद स्टेशन में हुए बदलाव की सराहना करते हुए रेलवे अधिकारियों और पूरी टीम को बधाई दी। अमित शाह ने कहा कि यात्री सुविधा, सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुआ है।
1472 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाओं की सौगात
अमित शाह ने बताया कि रविवार को जिन रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया, उनमें कुल 1,472 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से गुजरात के इस क्षेत्र में रहने वाले और यहां से यात्रा करने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। रेलवे की नई सुविधाओं को उन्होंने यात्री सुविधा, सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
साबरमती बनेगा मल्टीमॉडल परिवहन केंद्र
साबरमती रेलवे स्टेशन और इसके आसपास का रेल ढांचा गुजरात में चल रही बड़ी रेलवे परियोजनाओं का हिस्सा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल गलियारे के तहत साबरमती को मल्टीमॉडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस व्यवस्था में बुलेट ट्रेन, मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और रेलवे नेटवर्क को आपस में जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों को अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत कमी का अनुमान
रेलवे के मुताबिक, एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन वाली प्रणाली अपनाने से डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है। इससे ईंधन की लागत घटने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में भी कमी आने की संभावना है। साबरमती एकीकृत कोचिंग डिपो की 1,400-1,400 अश्वशक्ति क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन प्रणाली में बदला गया है। इनका इस्तेमाल आठ कोच वाली ट्रेन के संचालन में किया जाएगा।
हर इंजन से करीब 11.9 लाख रुपये सालाना बचत का अनुमान
रेलवे के अनुसार एलएनजी के इस्तेमाल से डीजल की तुलना में ईंधन लागत कम होने की उम्मीद है। प्रत्येक इंजन से सालाना करीब 11.9 लाख रुपये की बचत का अनुमान लगाया गया है।दोनों इंजनों को मिलाकर यह बचत करीब 23.9 लाख रुपये सालाना होने का अनुमान है। एलएनजी आधारित परिचालन से कार्बन उत्सर्जन के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य प्रदूषक तत्वों के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।
एलएनजी और डीजल दोनों पर चलेगी ट्रेन
दोहरे ईंधन वाली प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि डीजल इंजन की शक्ति, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता बरकरार रहे। इंजन एलएनजी और डीजल दोनों ईंधनों पर चल सकता है और जरूरत के अनुसार दोनों के बीच बदलाव किया जा सकता है। रेलवे के मुताबिक, यदि किसी स्थान पर एलएनजी उपलब्ध नहीं होती है तो ट्रेन को डीजल पर चलाया जा सकेगा। इससे ईंधन की उपलब्धता से जुड़ी समस्या के कारण लंबी दूरी के परिचालन में रुकावट की संभावना कम होगी।
रेलवे के लिए ऊर्जा दक्षता की दिशा में कदम
एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन वाली ट्रेन की शुरुआत को रेलवे के ऊर्जा उपयोग में बदलाव की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। डीजल की खपत कम होने और प्रदूषक उत्सर्जन घटने से परिचालन लागत तथा पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साबरमती में शुरू हुई इस परियोजना के साथ यात्री सुविधा, सुरक्षा, संपर्क और पर्यावरणीय जरूरतों से जुड़ी अन्य रेलवे परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
