मृत व्यक्ति की पहचान इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंचाई गई कथित फर्जी शिकायत, मोबाइल नंबर-IP एड्रेस और डिजिटल दस्तावेजों की जांच की तैयारी
बरेली : बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) से जुड़े अधिकारियों को कथित तौर पर बदनाम करने और उन पर दबाव बनाने के लिए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल का दुरुपयोग किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक मृत व्यक्ति के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।बताया जा रहा है कि मृत व्यक्ति के बेटे की ओर से इस मामले में गंभीर सवाल उठाए गए हैं और कथित शिकायत के पीछे सक्रिय लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। बेटे द्वारा सामने रखे गए तथ्यों के बाद अब यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया,बल्कि इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क या कथित सिंडिकेट की भूमिका होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
सख्ती के बाद अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश का आरोप
प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, व्यवस्था में सख्ती किए जाने के बाद संदिग्ध गतिविधियों, अनावश्यक हस्तक्षेप और कथित दबाव बनाने के प्रयासों पर रोक लगाने की कोशिश की गई।आरोप है कि इसी कार्रवाई से नाराज कुछ लोग अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और उनकी छवि खराब करने के लिए फर्जी नामों और दस्तावेजों के माध्यम से शिकायतें कराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, किसी संगठित सिंडिकेट की भूमिका और उससे जुड़े व्यक्तियों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
मृत व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कथित शिकायत में एक ऐसे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है, जिसकी मृत्यु हो चुकी है। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी मृत व्यक्ति के नाम और दस्तावेजों का जानबूझकर इस्तेमाल कर सरकारी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई, तो मामला गंभीर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है। मृत व्यक्ति के बेटे द्वारा मामले को सामने लाए जाने के बाद अब कथित शिकायतकर्ता की वास्तविक पहचान और शिकायत दर्ज कराने के तरीके की जांच की मांग तेज हो गई है।
मोबाइल नंबर, ईमेल और IP एड्रेस से खुलेगा राज
इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कराए जाने की तैयारी बताई जा रही है। जांच के दायरे में कथित शिकायत दर्ज कराने में इस्तेमाल किए गए, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आईपी एड्रेस अपलोड किए गए डिजिटल दस्तावेज, शिकायत दर्ज करने का समय और तकनीकी रिकॉर्ड जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि शिकायत वास्तव में किस व्यक्ति या डिवाइस से दर्ज की गई थी और मृत व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कैसे हुआ।
साबित हुआ तो जालसाजी समेत गंभीर धाराओं में कार्रवाई संभव
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार,यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर किसी मृत व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी पोर्टल पर गलत या भ्रामक शिकायत दर्ज कराई है, तो जांच के निष्कर्षों के आधार पर जालसाजी, प्रतिरूपण,मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की संभावना बन सकती है। हालांकि, किस व्यक्ति के खिलाफ कौन-सी धाराएं लगेंगी, इसका फैसला जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और सक्षम जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही होगा।
सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करने वालों पर भी नजर
मामले से जुड़े अपुष्ट आरोपों और कथित दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले अकाउंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी या निराधार आरोपों का प्रसार कर किसी अधिकारी अथवा सरकारी संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो संबंधित लोगों को कानूनी नोटिस देने और अन्य वैधानिक कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
BDA का रुख-सही शिकायत की होगी जांच, फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं
प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नागरिक की तथ्यात्मक और वास्तविक शिकायत को नियमानुसार गंभीरता से लिया जाएगा और उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। लेकिन यदि सरकारी शिकायत प्रणाली का इस्तेमाल फर्जी पहचान, मृत व्यक्ति के नाम या गलत दस्तावेजों के जरिए किसी अधिकारी पर दबाव बनाने अथवा उसकी छवि खराब करने के लिए किया गया है, तो ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में क्या सामने आता है और कथित शिकायत के पीछे कौन लोग हैं।
