समितियों के पुनर्गठन और प्रतिनिधित्व से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट का फैसला, पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक भी संचालक पद से हटे
मुजफ्फरनगर: जिला सहकारी बैंक के सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपना पद गंवाना पड़ा है। हाईकोर्ट ने ठाकुर रामनाथ सिंह समेत तीन संचालकों को पद से हटाने का फैसला सुनाया है। अदालत के आदेश के बाद उनका जिला सहकारी बैंक के सभापति पद पर बने रहना समाप्त हो गया है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की वरिष्ठ पीठ के न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और इंद्रजीत शुक्ला ने की। अदालत के आदेश का असर जिला सहकारी बैंक के बोर्ड से जुड़े तीन संचालकों पर पड़ा है।
2023 में चुने गए थे जिला सहकारी बैंक के सभापति
ठाकुर रामनाथ सिंह को जून 2023 में मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक का सभापति चुना गया था। वह खेड़ा मस्तान समिति से जुड़े हुए हैं। सभापति चुने जाने के बाद वह जिला सहकारी बैंक के बोर्ड में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब समितियों के पुनर्गठन और उनके प्रतिनिधित्व से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी सभापति की कुर्सी चली गई है।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला समितियों के पुनर्गठन और जिला सहकारी बैंक के बोर्ड में उनके प्रतिनिधित्व से जुड़ा है। करीब छह महीने पहले सचिन जैन की ओर से इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया था कि समितियों के विभाजन के बाद संबंधित प्रतिनिधि अपनी पुरानी समितियों के बोर्ड का हिस्सा नहीं रहे। इसी आधार पर इन प्रतिनिधियों के संचालक पद पर बने रहने की वैधता को चुनौती दी गई थी। मामला संजय जैन बनाम सरकार के रूप में हाईकोर्ट के सामने आया। सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया, जिसके बाद तीन संचालकों के पद प्रभावित हुए।
तीन संचालकों पर पड़ा हाईकोर्ट के आदेश का असर
हाईकोर्ट के आदेश का असर जिला सहकारी बैंक के तीन संचालकों पर पड़ा है। ठाकुर रामनाथ सिंह के अलावा संचालक पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक अधिवक्ता भी अपने संचालक पद से पदमुक्त हो गए हैं। तीनों अलग-अलग समितियों से जुड़े हुए हैं। ठाकुर रामनाथ सिंह खेड़ा मस्तान समिति, बिजेंद्र मलिक पीनना समिति और पंकज पाल मुजफ्फरनगर पश्चिमी समिति से जुड़े हैं।
समितियों के पुनर्गठन के बाद बदली स्थिति
पूरे मामले में समितियों के पुनर्गठन को अहम माना जा रहा है। याचिका में इसी पुनर्गठन के बाद पुराने बोर्ड और उनके प्रतिनिधियों के बीच संबंध को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत के फैसले के बाद अब जिला सहकारी बैंक के बोर्ड में इन तीनों संचालकों की स्थिति बदल गई है। ठाकुर रामनाथ सिंह के पद से हटने के बाद जिला सहकारी बैंक के सभापति पद को लेकर भी आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हाईकोर्ट के इस फैसले को सहकारी समितियों के पुनर्गठन और उनके प्रतिनिधित्व से जुड़े मामलों में अहम माना जा रहा है।
