हाथरस : जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र के थाना हसायन अंतर्गत ग्राम इटर्नी में बघेल (गडरिया) समाज के एक परिवार द्वारा घर के बाहर कथित पलायन का पोस्टर लगाए जाने का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग, लखनऊ तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने मामले को लेकर आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और संबंधित परिवार की सुरक्षा की मांग की है। बताया गया है कि परिवार की ओर से घर के बाहर लगाए गए पोस्टर पर लिखा है- “सवर्ण समाज के दबंगों से तंग होकर बघेल समाज पलायन को मजबूर।”
कथित उत्पीड़न और धमकी की जांच की मांग
शिकायत में कहा गया है कि यदि किसी परिवार को कथित मारपीट, धमकी, सामाजिक दबाव, उत्पीड़न या जातिगत भेदभाव के कारण अपना घर अथवा गांव छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, तो यह गंभीर मानवाधिकार का मामला हो सकता है। अधिवक्ता ने आयोग से यह जांच कराने की मांग की है कि परिवार द्वारा पलायन का पोस्टर लगाए जाने के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या हैं और क्या उन्हें जातिगत आधार पर धमकी, दबाव, मारपीट, सामाजिक उत्पीड़न या भेदभाव का सामना करना पड़ा है।
डीएम और एसपी से रिपोर्ट तलब करने की मांग
शिकायत में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग से मामले का स्वतः संज्ञान लेने अथवा शिकायत के रूप में पंजीकरण कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है इसके साथ ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, हाथरस से पूरे मामले की विस्तृत तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट तलब करने की मांग की गई है। अधिवक्ता ने पूर्व में पुलिस को दी गई शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की भी जांच कराने का अनुरोध किया है।
FIR, मेडिकल और पुलिस रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायत में संबंधित परिवार के सदस्यों के बयान बिना किसी दबाव या भय के स्वतंत्र वातावरण में दर्ज कराने की मांग की गई है। इसके अलावा यदि पूर्व में कोई शिकायत दी गई है तो उसकी जांच और पुलिस कार्रवाई के अभिलेखों को भी देखने का अनुरोध किया गया है। अधिवक्ता ने FIR, जीडी/डीडी, मेडिकल परीक्षण, गिरफ्तारी और विवेचना से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग भी आयोग के समक्ष रखी है।
आरोप सही मिलने पर कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में किसी संज्ञेय अपराध अथवा जातिगत उत्पीड़न की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार प्राथमिकी और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायतकर्ता एवं गवाहों को किसी भी तरह की धमकी, प्रतिशोधात्मक कार्रवाई या सामाजिक दबाव से बचाने की मांग की गई है। अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि किसी नागरिक को अपने ही गांव में भय के वातावरण में रहने या कथित उत्पीड़न के कारण घर छोड़ने के लिए मजबूर होना लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सत्य मानने के बजाय स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने राज्य मानवाधिकार आयोग से मामले में त्वरित हस्तक्षेप, निष्पक्ष जांच, संबंधित परिवार की सुरक्षा तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
