बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड का पर्यावरण मिशन,जल, जंगल और जैव-विविधता बचाने की पहल
बरेली : पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार को लेकर बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से 21 अगस्त को विशेष अभियान आयोजित किया जाएगा। इसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना की मौजूदगी में प्रोगाम की रूपरेखा तैयार की गई। 21 अगस्त को सुबह 9 बजे होने वाले कार्यक्रम में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण के साथ नकटिया नदी के पुनर्जीवन से जुड़ी प्रस्तावित पहलों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस पहल का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि नकटिया नदी की स्वच्छता, जल संरक्षण, नदी के आसपास हरित क्षेत्र के विकास और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एकीकृत प्रयास करना है।
नकटिया नदी को फिर मिलेगा हराभरा स्वरूप
नकटिया नदी पुनर्जीवन योजना के तहत नदी की स्वच्छता और उसके आसपास के पर्यावरण को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अंतर्गत तटवर्ती क्षेत्रों में पौधारोपण, हरित पट्टी विकसित करने, जल संरक्षण तथा नदी की पारिस्थितिकी को पुनर्स्थापित करने से संबंधित पहल प्रस्तावित हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड का मानना है कि नदी का पुनर्जीवन केवल जलधारा की सफाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए नदी के आसपास के पूरे पर्यावरणीय क्षेत्र को विकसित करना जरूरी है। जिससे जल संरक्षण के साथ जैव-विविधता को भी बढ़ावा मिल सके।
पौधारोपण के साथ संरक्षण पर फोकस
अभियान के दौरान वृक्षारोपण के साथ लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनके दीर्घकालिक विकास पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया जाएगा। बोर्ड का लक्ष्य कैंटोनमेंट क्षेत्र को अधिक स्वच्छ, हरित और पर्यावरण -अनुकूल बनाना है। कार्यक्रम के जरिए जल संरक्षण,जैव-विविधता संवर्धन और हरित क्षेत्र के विस्तार को एक-दूसरे से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में स्थायी पहल विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
CEO डॉ. तनु जैन ने बताया अभियान का उद्देश्य
बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड की CEO डॉ. तनु जैन के अनुसार अभियान का उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी पर्यावरणीय संसाधनों का निर्माण करना है। जिनका लाभ वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी मिल सके। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा, बेहतर जल पारिस्थितिकी और समृद्ध जैव-विविधता के लिए पौधारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण और नदी एवं उसके आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र के पुनर्जीवन पर भी निरंतर काम किया जाना जरूरी है।
