मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस सम्मेलन में युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने वाले युवाओं को राष्ट्रविरोधी कहना उचित नहीं है। लोकतंत्र में आंदोलन अपनी बात रखने, संवाद शुरू करने और सहमति बनाने का एक वैध माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतभेदों का समाधान बातचीत और आपसी सम्मान से ही संभव है।
संविधान के दायरे में ही निकले समस्याओं का समाधान
मोहन भागवत ने कहा कि देश की सभी समस्याओं का समाधान भारतीय संविधान के दायरे में रहकर ही तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के बताए संवैधानिक मार्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संविधान का सम्मान आवश्यक है। उन्होंने भारतीय परंपरा की ‘शास्त्रार्थ’ संस्कृति का जिक्र करते हुए समाज में स्वस्थ संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।
आज का युवा सवाल पूछता है, यही सकारात्मक बदलाव है
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा की पीढ़ी पहले की तुलना में अलग सोच रखती है। आज के युवा बिना समझे किसी बात को स्वीकार नहीं करते और हर विषय पर तार्किक व तथ्य आधारित जवाब चाहते हैं। उनके अनुसार यह बदलाव नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अधिक ईमानदार, जिम्मेदार और देशभक्त है तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
शिक्षा सेवा का माध्यम बने, रोजगार का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं
शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा को केवल व्यवसाय या कमाई का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों के लगभग 10 लाख रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए शिक्षा पर सकल बजट का छह प्रतिशत खर्च किए जाने की मांग का समर्थन किया। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नौकरी ही रोजगार का एकमात्र विकल्प नहीं है। युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए ताकि वे स्वयं के साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें।
पैलेट गन और सोशल मीडिया पर भी रखी राय
छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए बिना तथ्यात्मक जानकारी के कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि किसी पर विश्वास करने की बात होगी तो वह जेन-जी के युवाओं पर विश्वास करेंगे। सोशल मीडिया को लेकर उन्होंने कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की सोच बदलना भी जरूरी है। आधुनिक तकनीक के दौर में फर्जी वीडियो आसानी से बनाए जा रहे हैं, इसलिए विश्वसनीय और प्रमाणिक स्रोतों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
