विदेश जाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार, बिना ठोस कारण नहीं रोक सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
आपराधिक मुकदमा लंबित होने मात्र से विदेश यात्रा पर रोक नहीं; ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द, 15 दिन में नए सिरे से फैसला लेने के निर्देश
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विदेश यात्रा करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। किसी व्यक्ति को केवल आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर विदेश जाने से नहीं रोका जा सकता, जब तक इसके पीछे कोई ठोस कानूनी कारण मौजूद न हो। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने महराजगंज निवासी वजीर आलम की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
महराजगंज निवासी वजीर आलम के खिलाफ वर्ष 2021 में मारपीट और जानलेवा हमले के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। यह मामला अभी ट्रायल कोर्ट में लंबित है। इस बीच वजीर आलम ने रोजगार के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
याची ने रखी आर्थिक मजबूरी
याची की ओर से अदालत को बताया गया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और अपने दो बच्चों तथा बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी निभाने के लिए विदेश में नौकरी करना चाहता है। वकील ने दलील दी कि मुकदमे की पैरवी परिवार के अन्य सह-आरोपी सदस्य करेंगे और जब भी अदालत बुलाएगी, याची स्वयं उपस्थित होगा।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने विदेश यात्रा की अनुमति न देने के लिए कोई ठोस कारण अपने आदेश में दर्ज नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की 25 अगस्त 1993 की अधिसूचना पर भी विचार नहीं किया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि याची पहले कभी किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया है और लंबित मामले में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। अदालत ने माना कि मामला जघन्य अपराध की श्रेणी में भी नहीं आता।
15 दिन में दोबारा फैसला लेने के निर्देश
इन तथ्यों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया और निर्देश दिया कि वजीर आलम की विदेश यात्रा संबंधी अर्जी पर 15 दिनों के भीतर सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से निर्णय लिया जाए। अदालत ने अपने आदेश में दोहराया कि बिना उचित कानूनी आधार किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
