उझानी में मुस्लिम युवक ने धर्मबहन का किया कन्यादान, भावुक पल ने दिया भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश
बदायूं/उझानी : बदायूं जिले के उझानी से इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक समरसता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। यहां एक मुस्लिम युवक ने अपनी धर्मबहन का पूरे सम्मान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ कन्यादान कर यह साबित कर दिया कि रिश्तों की पहचान धर्म या जाति से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनापन से होती है।
उझानी के साहूकारा मोहल्ले की रहने वाली दीपांशी, जो अपने माता-पिता को खो चुकी हैं, जीवन के कठिन दौर में अकेली पड़ गई थीं। ऐसे समय में रियासत अली, पुत्र शराफत अली, ने उन्हें अपनी धर्मबहन का सम्मान दिया। समय के साथ यह रिश्ता और मजबूत होता गया और रियासत अली हर सुख-दुख में सगे भाई की तरह उनके साथ खड़े रहे।
दीपांशी का विवाह कमलकांत, पुत्र स्वर्गीय राजीव, निवासी साहूकारा, उझानी के साथ एस.एस. ग्रीन बैंक्वेट हॉल में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। विवाह के सबसे भावुक क्षण में रियासत अली ने अपनी धर्मबहन का कन्यादान कर भाई होने का फर्ज निभाया। इस दृश्य ने विवाह समारोह में मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
समारोह में मौजूद लोगों ने रियासत अली की इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि ऐसे उदाहरण समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब समाज को एकता और सद्भाव की सबसे अधिक जरूरत है, तब ऐसी घटनाएं नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनती हैं।
उझानी की यह घटना गंगा-जमुनी तहज़ीब की उस परंपरा को मजबूत करती है, जिसने वर्षों से अलग-अलग धर्मों और समुदायों को प्रेम और सम्मान के सूत्र में बांधे रखा है। यह केवल कन्यादान की रस्म नहीं थी, बल्कि इंसानियत, विश्वास और सामाजिक समरसता का ऐसा संदेश था, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।