बुलंदशहर: बुलंदशहर की अदालत ने सलेमपुर थाना क्षेत्र में सगे भाई की हत्या के चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे तबरेज़ अहमद की अदालत ने आरोपी वीरेंद्र सिंह को अपने ही भाई कुमरपाल सिंह उर्फ गुड्डू की चाकू मारकर हत्या करने का दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी को अवैध हथियार रखने के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग से सजा दी गई है।
28 मई 2020 को हुआ था भाइयों के बीच झगड़ा, पेट में चाकू मारने का आरोप
अभियोजन के अनुसार यह मामला 28 मई 2020 की शाम का है। ग्राम निभैडा, थाना सलेमपुर निवासी कुमरपाल सिंह उर्फ गुड्डू अपने घर के पास हैंडपंप की नाली साफ कर रहे थे। तभी उनका भाई वीरेंद्र सिंह वहां पहुंचा और दोनों के बीच कहासुनी व मारपीट हो गई। आरोप है कि इसी दौरान वीरेंद्र सिंह ने कुमरपाल के पेट में चाकू मार दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिवार और ग्रामीणों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाया गया। शुरू में पुलिस ने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया, लेकिन इलाज के दौरान 2 जून 2020 को कुमरपाल की मौत हो जाने के बाद मामले में धारा 302 आईपीसी बढ़ा दी गई।
पुलिस ने छुरी बरामद की, दो मुकदमे एक साथ चले
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी वीरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि घटना में इस्तेमाल की गई छुरी उसने जंगल के पास झाड़ियों में छिपा दी थी। इसके बाद उसकी निशानदेही पर छुरी बरामद की गई। इस बरामदगी के आधार पर आर्म्स एक्ट का एक अलग मुकदमा भी दर्ज किया गया। चूंकि हत्या और हथियार बरामदगी दोनों मामले एक ही घटना से जुड़े थे, इसलिए अदालत ने दोनों सत्र वादों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की। मुख्य मुकदमा हत्या का बनाया गया और उसी के साथ आर्म्स एक्ट वाले केस का भी निस्तारण किया गया।
कोर्ट में क्या चला, अभियोजन ने क्या दलील दी
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अपने ही सगे भाई पर चाकू से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बरामदगी, विवेचना और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना।
उम्रकैद, जुर्माना और मृतक के बेटे को प्रतिकर देने का आदेश
अदालत ने वीरेंद्र सिंह को धारा 302 आईपीसी में सश्रम आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं आर्म्स एक्ट के मामले में उसे एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना न भरने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और मुकदमे के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। साथ ही अदालत ने कहा कि जुर्माने की पूरी राशि मृतक कुमरपाल सिंह के पुत्र युवराज सिंह को मानसिक पीड़ा और क्षति की भरपाई के तौर पर दी जाए।
