मुरादाबाद दौरे पर पहुंचे शंकराचार्य ने गौ रक्षा, राम मंदिर चढ़ावा विवाद, एनसीईआरटी में वेद शिक्षा और समलैंगिकता जैसे मुद्दों पर रखी बेबाक राय
मुरादाबाद : ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुरादाबाद दौरे के दौरान कई समसामयिक और धार्मिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर जाकर लोगों को गौ माता की रक्षा के लिए मतदान करने का संकल्प दिला रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के मतदाता अब गौ संरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाकर वोट देने की तैयारी कर रहे हैं।
गौ रक्षा को लेकर चला रहे हैं जनसंवाद अभियान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह प्रदेशभर में जनसंवाद यात्रा कर रहे हैं और अब तक ढाई सौ से अधिक विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि लोगों से संवाद के दौरान गौ माता की रक्षा का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आ रहा है और मतदाता ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनना चाहते हैं जो गोवंश संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हों।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर उठाए सवाल
राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले पर उन्होंने कहा कि यदि आरोप गंभीर हैं तो अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को समय के साथ दबाने की कोशिश की जा रही है।
एनसीईआरटी में वेद पढ़ाने के प्रस्ताव का किया विरोध
एनसीईआरटी की पुस्तकों में वेदों को शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वेदों का अध्ययन सामान्य पाठ्यक्रम की तरह नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि वेद पढ़ने की अपनी परंपरा, नियम और मर्यादा होती है। उन्होंने कहा, “जूता पहनकर वेद नहीं पढ़ा जाता। वेद अध्ययन से पहले शुद्धता और विशेष प्रक्रिया का पालन किया जाता है। खबरदार, अगर इस तरह का कोई कोर्स लागू किया गया तो उसका विरोध होगा।”
समलैंगिकता पर भी जताई आपत्ति
समलैंगिकता के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण के समय जो बातें अपराध की श्रेणी में थीं, उन्हें बाद में अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया। उन्होंने इसे संविधान और पारंपरिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि ऐसे बदलाव समाज के चरित्र को प्रभावित कर सकते हैं।
गोविंदानंद सरस्वती विवाद पर भी बोले
गोविंदानंद सरस्वती से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ दिल्ली में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया गया है और आगे भी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा
शंकराचार्य के इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। विशेष रूप से एनसीईआरटी में वेदों को शामिल करने के मुद्दे पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है।
रिपोर्ट: रेहान, मुरादाबाद
