सपा प्रमुख का डबल अटैक- कोचिंग बंदी और वायरल वीडियो पर भाजपा को घेरा
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कानून-व्यवस्था, शिक्षा, भ्रष्टाचार और संवेदनशीलता जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।गुरुवार को जारी बयान और सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि जनता अब भाजपा नेताओं के भाषण सुनने के मूड में नहीं है और सरकार की कथनी-करनी का अंतर खुलकर सामने आ चुका है।
‘कोचिंग बंदी’ के नाम पर उगाही का आरोप

एसपी चीफ अखिलेश यादव ने प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों पर चल रही कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन सरकार कोचिंग संस्थानों को बंद कर छात्रों और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ा रही है। उनका आरोप है कि सुरक्षा जांच और अनुमति के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही का खेल शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोचिंग संस्थानों को अचानक बंद किया गया, तो लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। बेहतर होता कि संस्थानों को नोटिस देकर सुरक्षा मानकों को तत्काल पूरा करने का समय दिया जाता, ताकि छात्रों के कोर्स प्रभावित न हों।
वायरल वीडियो को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
सपा प्रमुख ने एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए भाजपा के एक “तथाकथित माननीय” पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दुखी परिवार को सांत्वना देने के बजाय धमकी भरे अंदाज में बात करने वाला व्यक्ति संवेदनहीन और अमानवीय है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस घटना ने भाजपा की “नारी सम्मान” की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि जनता अब नेताओं के व्यवहार को देख रही है और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भाजपा की कथित सोच उजागर हो गई है। सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि यदि किसी नेता का अपने शब्दों और व्यवहार पर नियंत्रण नहीं है, तो वह जनता का विश्वास खो देता है।
भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर है। उनके मुताबिक प्रदेश का शायद ही कोई विभाग ऐसा बचा हो जहां भ्रष्टाचार की शिकायतें न हों। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “भाजपाई आपदा में भी संपदा ढूंढ लेते हैं।”अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी भाजपा सरकार और उसके नेताओं पर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि जनता अब तथ्यों को समझ रही है और राजनीतिक प्रचार के बजाय वास्तविक कामकाज और व्यवहार के आधार पर निर्णय ले रही है।
रिपोर्ट : मुहम्मद साजिद
