बरेली : यूपी के बरेली देहात की थाना शाही पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा कर बैंक कर्मचारी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र कुमार मिश्रा, हिमांशु पटेल और आसिफ के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन को अंजाम दिया। शुरुआती जांच में पिछले दो महीनों के दौरान करीब 14 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन और बेटिंग नेटवर्क से जुड़े साक्ष्य मिले हैं। इस मामले में नामजद आरोपी विशाल पटेल, फाजिल गद्दी, सागर समेत कई अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
15 हजार रुपये की नौकरी का लालच देकर युवक के नाम पर बनाई फर्जी फर्म
पुलिस के मुताबिक बारादरी क्षेत्र के दुर्गा नगर निवासी विशाल गिरि ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उसे 15 हजार रुपये प्रतिमाह नौकरी देने का झांसा दिया। इसके बाद उसके नाम पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर लिए गए। आरोपियों ने इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए “कुमार एनर्जी” नाम से एक फर्जी फर्म बनाई और सिविल लाइंस स्थित एलवी कॉम्प्लेक्स में उसका कार्यालय संचालित किया। फर्म को वैध दिखाने के लिए विशाल गिरि को वहां बैठाया जाता था जबकि उसके नाम का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
फर्जी खातों से करोड़ों का ट्रांजैक्शन,पुलिस ने ऐसे दबोचे आरोपी
मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना शाही पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान मुख्य आरोपी जितेंद्र कुमार मिश्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने बिथरी चैनपुर क्षेत्र में दबिश देकर हिमांशु पटेल और आसिफ को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी फर्मों के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे और उन खातों के जरिए पैसों का लेनदेन करते थे। रकम आने के बाद उसे तुरंत निकालकर आपस में बांट लिया जाता था और बाद में खातों को बंद कर दिया जाता था ताकि किसी को शक न हो।
बैंक कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड, 14 करोड़ के अवैध नेटवर्क की जांच जारी
पूछताछ में आरोपी जितेंद्र कुमार मिश्रा ने स्वीकार किया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसने बताया कि पहले से संचालित फर्जी फर्म बंद हो चुकी थी और गिरोह एक नई फर्जी फर्म तैयार करने की योजना बना रहा था, जिसके लिए नकली दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए थे। पुलिस के अनुसार अब तक की जांच में फर्जी फर्मों के जरिए पिछले दो महीनों में करीब 14 करोड़ रुपये के ऑनलाइन बेटिंग और अन्य अवैध वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। मामले में नामजद आरोपी विशाल पटेल, फाजिल गद्दी, सागर समेत अन्य संदिग्ध अभी फरार हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।बरामदगी में 5 एटीएम कार्ड, कुमार एनर्जी फर्म के नाम की मुहर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पासबुक और चेकबुक, एक पैन कार्ड, एक आधार कार्ड तथा तीन मोबाइल फोन शामिल हैं।
