केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन में लेबर कोड, निजीकरण,महंगाई और बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा, राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रम का ऐलान
नई दिल्ली/बरेली : देश की राजधानी नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में बुधवार को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयू), विभिन्न कर्मचारी संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के संयुक्त तत्वावधान में विशाल राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में देशभर से हजारों किसान, मजदूर, कर्मचारी, महिला प्रतिनिधि और युवाओं ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान श्रमिक-किसान एकता को मजबूत करने और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर संयुक्त संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया। साथ ही 10 अगस्त 2026 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई।
बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण पर नाराजगी

बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने बताया कि सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने श्रमिकों और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उनके अनुसार,सम्मेलन में जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त आंदोलन को मजबूत करने का फैसला लिया गया और आगामी दिनों में देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति भी बनाई गई।।सम्मेलन को संबोधित करते हुए विभिन्न ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण,चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड), किसानों की लंबित मांगें और विदेशी व्यापार समझौतों का असर आम जनता, किसानों और श्रमिकों पर पड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि इन मुद्दों पर व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता है।
चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग

सम्मेलन में पारित घोषणा-पत्र में चारों लेबर कोड वापस लेने, ट्रेड यूनियन अधिकारों की सुरक्षा, ₹42,000 वैधानिक न्यूनतम मजदूरी लागू करने, स्वामीनाथन आयोग के सी-2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, सरकारी खरीद सुनिश्चित करने, निजीकरण पर रोक, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, मनरेगा को मजबूत करने तथा सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने जैसी मांगें रखी गईं। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि 10 अगस्त 2026 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ पर देशभर में जिला और राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन, मानव श्रृंखला, कार्यस्थलों पर प्रदर्शन तथा अन्य शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
श्रमिक विरोधी नीतियों पर सरकार करे पुनर्विचार
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि यदि बिजली क्षेत्र के निजीकरण, प्रस्तावित विद्युत संशोधन विधेयक और श्रमिक विरोधी नीतियों पर सरकार ने पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से इस घोषणा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 10 अगस्त को प्रस्तावित आंदोलन पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि देशभर में इस आंदोलन को कितना जनसमर्थन मिलता है और सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है। इसी बीच मध्य प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में किसानों के आंदोलन भी चर्चा में हैं, जबकि दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रम की तैयारियां तेज होने का दावा आंदोलनकारी संगठन कर रहे हैं।
