पीलीभीत : पीलीभीत में शराब की दुकानों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। गांव में शराब की दुकान खुलवाने को लेकर हुए बवाल, पुलिस लाठीचार्ज और ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज होने के बाद अब प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है। विरोध बढ़ता देख जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह खुद गांव पहुंचे और ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर बड़ा ऐलान कर दिया। डीएम ने साफ कहा कि गांव के अंदर शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी और उसे दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही जिस जमीन पर दुकान प्रस्तावित थी, वहां अब इंटर कॉलेज खोलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
दरअसल पूरा मामला पीलीभीत जिले के माधौटांडा इलाके में नेपाल सीमा से सटे बूंदीभूड़ गांव का है। कुछ दिन पहले यहां शराब की दुकान खोले जाने की तैयारी चल रही थी, जिसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के बीच शराब की दुकान खुलने से माहौल खराब होगा और युवाओं पर इसका गलत असर पड़ेगा। लेकिन जब आबकारी विभाग की टीम, एसडीएम और पुलिस मौके पर दुकान खुलवाने पहुंचे तो हालात बिगड़ गए। ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते झड़प और मारपीट में बदल गई। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। कई ग्रामीणों पर मुकदमे भी दर्ज कर दिए गए।
घटना के बाद मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। विपक्षी दलों ने प्रशासन को घेरते हुए इसे सरकारी तानाशाही करार दिया। ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ने लगा। बढ़ते विवाद को देखते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक खुद गांव पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई और उनकी समस्याएं सुनीं। डीएम ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा और पुलिस किसी के घर दबिश नहीं देगी। उन्होंने कहा कि दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई होगी।
सबसे बड़ा फैसला लेते हुए डीएम ने ऐलान किया कि गांव के भीतर शराब की दुकान नहीं खुलेगी। उन्होंने कहा कि दुकान को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, वहां अब छात्र-छात्राओं के लिए इंटर कॉलेज बनाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। डीएम के इस ऐलान के बाद ग्रामीणों में कुछ राहत जरूर देखने को मिली।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि नेपाल सीमा से सटे इलाके में अवैध शराब की बिक्री और नेपाल से शराब आने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने आसपास शराब की दुकान आवंटित करने का फैसला लिया था। हालांकि उन्होंने माना कि प्रशासन को यह अंदाजा नहीं था कि मामला इतना बढ़ जाएगा।
फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी बात पहले ही सुन ली जाती और दुकान को गांव से बाहर शिफ्ट कर दिया जाता, तो न बवाल होता, न लाठीचार्ज और न ही ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज होते। वहीं अब प्रशासन गांव में शांति बनाए रखने और लोगों का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश में जुटा हुआ है।
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
