नई दिल्ली : देश में 1 मई से आम उपभोक्ताओं और व्यावसायिक क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली ईंधन कीमतों में अहम बदलाव देखने को मिला है। खास तौर पर वाणिज्यिक उपयोग में आने वाले गैस सिलिंडरों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल के दामों को स्थिर रखा गया है।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की कीमत में एक साथ 993 रुपये का इजाफा किया गया है। इसके बाद राजधानी दिल्ली में इस सिलिंडर की नई कीमत 3071.50 रुपये हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा, जहां इस तरह के सिलिंडरों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
हालांकि आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरें भी पहले की तरह स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू स्तर पर स्थिरता बनाए रखने का फैसला किया है। इसी के तहत विमानन टरबाइन ईंधन की कीमतों में भी घरेलू एयरलाइनों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है, ताकि हवाई यात्रा की लागत में अचानक बढ़ोतरी न हो।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि आम जनता से जुड़े प्रमुख ईंधनों की कीमतों को यथावत रखा गया है। कंपनी के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतें उन उपभोक्ताओं के लिए स्थिर हैं, जो कुल खपत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसी तरह, करीब 33 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को भी किसी प्रकार की कीमत वृद्धि का सामना नहीं करना पड़ेगा।
तेल कंपनियों का कहना है कि कुल पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 80 प्रतिशत ऐसे हैं जिनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि लगभग 16 प्रतिशत उत्पाद मुख्य रूप से औद्योगिक ईंधन की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, करीब 4 प्रतिशत उत्पादों की कीमतों में कमी भी आई है, जो वैश्विक बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाणिज्यिक सिलिंडरों की कीमतों में यह बढ़ोतरी उद्योग और सेवा क्षेत्र पर असर डाल सकती है, जिससे आने वाले समय में होटल और खानपान सेवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, सरकार और तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कीमतों को स्थिर रखा है, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में वैश्विक कीमतों के अनुसार समायोजन किया गया है।
