सपा प्रमुख का लोकतंत्र बचाने का आह्वान, यूपी में महिला अपराध बढ़ने का दावा
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एक बार फिर अपने तीखे बयान से सियासी माहौल गरमा दिया है। उन्होंने कहा- “अंत में सब मरोगे, इसलिए कम से कम लोकतंत्र बचाने के लिए आगे आ जाओ।” इस बयान को राजनीतिक हलकों में बड़ा संदेश माना जा रहा है। सपा प्रमुख ने अपने बयान के जरिए जनता और कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना था कि मौजूदा समय में लोकतंत्र पर खतरे के हालात बन रहे हैं, ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इसके संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।
सरकार पर निशाना, व्यवस्था पर उठाए सवाल
एसपी चीफ अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने की कोशिशें हो रही हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
सियासत से ऊपर इंसानियत: अखिलेश यादव पहुंचे BJP विधायक अनुपमा जायसवाल का हाल जानने

यूपी की राजधानी लखनऊ में स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल से मिलने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहुंचे। बहराइच में पुतला दहन के दौरान झुलसी विधायक का हालचाल लेने पहुंचे सपा प्रमुख ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। सोशल मीडिया पर सपा प्रमुख ने लिखा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन मानवीय संबंध ज्यादा अहम हैं। इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में उनकी इस पहल को “सकारात्मक राजनीति” का उदाहरण बताया जा रहा है।
पोस्टिंग पर सियासी वार: “क्या रिश्तेदारी से मिलती हैं बड़ी तैनातियां?”
एसपी चीफ ने नियुक्तियों और प्रशासनिक तैनातियों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रभावशाली पदों पर पोस्टिंग रिश्तेदारी और संबंधों के आधार पर दी जा रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि आगरा और नोएडा जैसे अहम जिलों में तैनाती को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या बिना संबंधों के कोई शीर्ष पद तक पहुंच सकता है।
5 लाख की मदद के बाद अखिलेश का बड़ा बयान: “न्याय अभी अधूरा, झूठे मुकदमे वापस हों”

सपा प्रमुख ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कहा कि पार्टी ने 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि परिवार को पूरी तरह न्याय मिलना चाहिए और सपा कार्यकर्ताओं पर लगाए गए कथित झूठे मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कार्रवाई कर रही है।
यूपी में अपराध बढ़े, न्याय नहीं मिल रहा
उन्होंने एक बार फिर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा।।लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि गाजीपुर, हरदोई, प्रतापगढ़ और फतेहपुर जैसे जिलों में बेटियों के साथ जघन्य घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में “जीरो टॉलरेंस” का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
“अपराधियों को संरक्षण, विपक्ष पर दबाव”
एसपी चीफ ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपराधियों को संरक्षण दे रही है और विपक्षी नेताओं को झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में आरोपी सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण कार्रवाई नहीं हो रही।
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर भी हमला
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने धार्मिक गुरुओं तक को नहीं बख्शा और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे “सनातन परंपरा के खिलाफ” बताया और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल पर भी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि वहां मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए बाहरी अधिकारियों और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा “रामपुर मॉडल” अपनाकर चुनाव प्रभावित करना चाहती है।
अभद्र वीडियो से सरकार की छवि धूमिल
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान ऑब्जर्वर बने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के वायरल वीडियो को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस घटना से शासन-प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचा है और “महिला सम्मान” के दावों की पोल खुल गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही विवादों में हों, तो महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। उन्होंने मामले में जल्द निलंबन या बर्खास्तगी की मांग करते हुए कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के रुख को भी स्पष्ट करेगी। सपा प्रमुख ने जोर देते हुए कहा कि “जीरो टॉलरेंस” सिर्फ अपराधियों पर नहीं, बल्कि ऐसे अधिकारियों पर भी लागू होना चाहिए।
