नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में जा रहे नेताओं को पुलिस ने बीच रास्ते रोका, श्रमिकों के समर्थन में सपा का प्रदर्शन तेज
नई दिल्ली/नोएडा : नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन के बीच शुक्रवार को सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित श्रमिकों से मिलने जाते हुए रास्ते में ही रोक दिया गया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में 12 सदस्यीय टीम नोएडा के लिए रवाना हुई थी। प्रतिनिधिमंडल में विधायक अतुल प्रधान, शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। हालांकि, सपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने पहले उन्हें घरों में नजरबंद करने की कोशिश की और फिर डीएनडी पर रोककर आगे बढ़ने से रोक दिया।
लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन- सपा का आरोप
सपा नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि उन्हें श्रमिकों से मिलने से रोकना उनकी आवाज दबाने की कोशिश है। पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि वह हर हाल में मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ती रहेगी।
जानें क्या है पूरा मामला?
नोएडा के फेस-2 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक लंबे समय से वेतन वृद्धि, ओवरटाइम भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आरोप है कि श्रमिकों से 10-12 घंटे काम लेकर मात्र 10-11 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है और साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिलता। बताया जा रहा है कि मदरसन इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों द्वारा शांतिपूर्ण धरना दिया जा रहा था, लेकिन प्रशासन ने इसे बलपूर्वक दबाने की कोशिश की। इस दौरान अभद्रता और लाठीचार्ज जैसे आरोप भी सामने आए हैं।
पुलिस का दावा-साजिश के तहत भड़काया गया आंदोलन
वहीं, पुलिस का कहना है कि श्रमिक आंदोलन के पीछे “मजदूर बिगुल दस्ता” नामक संगठन की सक्रियता सामने आई है। पुलिस के अनुसार, यह संगठन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उद्घाटन 2026 के बाद से क्षेत्र में सक्रिय हुआ और श्रमिकों को आंदोलन के लिए उकसाया। पुलिस ने दावा किया कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए सैकड़ों लोगों को जोड़कर माहौल को भड़काने की कोशिश की गई। इस मामले में जांच जारी है।
