500 मीट्रिक टन कचरे का होगा वैज्ञानिक निस्तारण, ट्रायल की तैयारी तेज
बरेली : शहर के लिए राहत भरी खबर है। अब सड़कों और डंपिंग यार्डों में लगे कूड़े के ढेर जल्द ही इतिहास बन सकते हैं। नगर निगम ने शहर के 80 वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 500 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए सथरापुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण तेज कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्लांट में मशीनों के इंस्टॉलेशन का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका ट्रायल शुरू किया जाएगा।
दिल्ली की संस्था ‘पाथ्या’ को मिली जिम्मेदारी, तेजी से लग रहे उपकरण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लागू करने के लिए दिल्ली की संस्था पीपुल्स एसोसिएशन फॉर टोटल हेल्प एप्लूज (पाथ्या) का चयन किया गया है। संस्था द्वारा मौके पर मशीनें पहुंचाकर उन्हें स्थापित करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी के अनुसार, यह प्लांट “जीरो वेस्ट मैनेजमेंट” के सिद्धांत पर आधारित होगा, जिससे कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
गीले कचरे से बनेगी CNG, बायोगैस और खाद
इस योजना के तहत शहर में डोर-टू-डोर कलेक्शन को और मजबूत किया जाएगा। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र होगा। गीले कचरे से CNG, बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जाएगी।सूखे कचरे का रीसाइक्लिंग और अन्य उपयोग होगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नगर निगम के लिए आय के नए स्रोत भी तैयार होंगे।
प्रति टन 446 रुपये भुगतान, पब्लिक-प्राइवेट मॉडल पर काम
नगर निगम इस परियोजना के तहत कार्यदायी संस्था को कचरा निस्तारण के बदले प्रति टन 446 रुपये का भुगतान करेगा। यह मॉडल शहर की सफाई व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ और प्रभावी बनाने में मददगार साबित होगा।
स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की बड़ी उम्मीद
पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली की रैंकिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। इसकी मुख्य वजहें थीं, पुराने कूड़े के ढेर (लीगेसी वेस्ट) का निस्तारण न होना। प्रोसेसिंग प्लांट का अभाव था। कचरे के पृथक्करण की कमजोर व्यवस्था, और केंद्र सरकार की टीम के निरीक्षण में इन कमियों के कारण शहर को कम अंक मिले थे।
15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम का सर्वे, निगम ने कसी कमर
अब जबकि 15 अप्रैल के बाद स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम के आने की संभावना है, नगर निगम पूरी तैयारी में जुट गया है।प्लांट का ट्रायल शुरू करने की योजना चल रही है। जिसके चलते कचरा पृथक्करण पर विशेष फोकस है। सफाई व्यवस्था को स्मार्ट और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।
