2009 से दीनी तालीम और हिफ्ज़-ए-कुरआन की खिदमत कर रहा मदरसा, तलबा की तालीम जारी रखने के लिए माली मदद जरूरी
बरेली : पाक और बरकतों से भरे महीने रमज़ान में नेकियों और खैरात (जकात) का सिलसिला तेज हो जाता है। इसी बीच बरेली के सदर बाज़ार कैंट स्थित मस्जिद अहलेहदीस में संचालित मदरसा अबुल कलाम आज़ाद लितहफीज़िल कुरआन अल करीम की ओर से अवाम से माली तआवुन की अपील की गई है। मदरसे के जिम्मेदारों का कहना है कि यह इदारा कई सालों से इलाके में दीनी तालीम और इस्लाही खिदमत अंजाम दे रहा है, लेकिन इसकी आमदनी का कोई स्थायी जरिया नहीं है, इसलिए यह पूरी तरह लोगों के सहयोग पर ही निर्भर है।
2009 से जारी है तालीमी और इस्लाही खिदमत
मदरसा इंतज़ामिया के अनुसार यह इदारा वर्ष 2009 से लगातार इलाके में दीनी तालीम की खिदमत कर रहा है। यहां बच्चों को हिफ्ज़ -ए- कुरआन, तजवीद और कुरआन मजीद नाज़रा की मुकम्मल तालीम दी जाती है। इसके साथ ही बच्चों की दीनी तरबियत, अख़लाक़ी इस्लाह और बेहतर शख्सियत निर्माण पर भी खास ध्यान दिया जाता है, ताकि वे समाज में जिम्मेदार और नेक इंसान बन सकें।
बाहर से आने वाले तलबा के लिए हॉस्टल की सुविधा
मदरसे में स्थानीय बच्चों के साथ -साथ दूसरे शहरों और इलाकों से आने वाले तलबा भी तालीम हासिल कर रहे हैं। ऐसे तलबा के लिए हॉस्टल की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जहां उनके रहने, खाने और रोजमर्रा की जरूरतों का इंतज़ाम मदरसा ही करता है। मदरसा प्रबंधन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए आर्थिक सहयोग बेहद जरूरी है।
अवाम के तआवुन से चल रहा है इदारा
मदरसे के खादिम मौलाना नफीस अहमद अलअसी ने बताया कि इस इदारे की आमदनी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। अब तक यह मदरसा इलाके के अहले खैर हजरात और मददगार लोगों के सहयोग से ही अपने तालीमी और इस्लाही मकसद को पूरा करता आया है।
रमज़ान में मदद की खास अपील
मौलाना नफीस अहमद अलअसी ने कहा कि रमज़ान का महीना नेकियों और खैरात का महीना है। उन्होंने अवाम से अपील की कि इस मुबारक महीने में आगे बढ़कर मदरसे का तआवुन करें, ताकि बच्चों की तालीम, उनकी देखभाल और तालीम-ए-कुरआन का यह सिलसिला बेहतर तरीके से जारी रखा जा सके। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों की छोटी-बड़ी मदद से ही ऐसे तालीमी इदारे आगे बढ़ते हैं और आने वाली नस्लों को दीनी और अख़लाक़ी तालीम देने का काम जारी रख पाते हैं।
